Sanskrit
तं दीनमनसं वीरं शोकोपहतमातुरम्। निःश्वसन्तं यथा नागं पर्यश्रुनयनं तथा॥ कुन्ती शोकपरीताङ्गी दुःखोपहतचेतना। अब्रवीन्मधुराभाषा काले वचनमर्थवत्॥
English
Seeing that hero cheerless and unnerved by grief, sighing like a snake and shedding profuse tears, Kunti, herself filled with grief and almost beside herself with sorrow, addressed him in these sweet but weighty
Hindi
उस वीर को खिन्न, शोक से निर्बल, सर्प के समान लम्बी साँसें लेते और अश्रुधारा बहाते देखकर स्वयं शोक से भरी और दुःख से लगभग आपे से बाहर हुई कुन्ती ने उनसे ये मधुर किन्तु गम्भीर वचन कहे —
Nepali
ती वीरलाई खिन्न, शोकले निर्बल, सर्पजस्तै लामो सास फेर्दै र आँसुको धारा बगाइरहेको देखेर स्वयं शोकले भरिएकी र दुःखले लगभग बेहोसजस्तै भएकी कुन्तीले उनलाई यी मधुर तर गम्भीर वचन भनिन् —