निमित्तानिनिमित्ताज्ञोदृष्टवालक्ष्मणपूर्वजः । सौमित्रिंसम्परिष्वज्यइदंवचनमब्रवीत् ।।6.23.1।।
Perceiving the portents, Rama spoke these words embracing Saumithri who was aware of the portents.
अपशकुनों को देखकर राम ने शकुनों के ज्ञाता सौमित्रि का आलिङ्गन करते हुए ये वचन कहे —
अपशकुन देखेर रामले शकुनका ज्ञाता सौमित्रिलाई अङ्गमाल गर्दै यी वचन भन्नुभयो —