Chapter 199

Anugita Parva — The three enemies are

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Verse 1
Sanskrit

ब्राह्मण उवाच त्रयो वै रिपवो लोके नवधा गुणतः स्मृताः। प्रहर्षः प्रीतिरानन्दस्त्रयस्ते सात्त्विका गुणाः॥

English

The Brahmana said There are three enemies in the world. They are said to be minefield, according to their qualities. Exultation, satisfaction, and joy, these three qualities belong to Goodness.

Hindi

ब्राह्मण ने कहा — संसार में तीन शत्रु हैं। अपने गुणों के अनुसार वे नौ प्रकार के कहे गए हैं। उल्लास, सन्तोष और आनन्द — ये तीन गुण सत्त्व के हैं।

Nepali

ब्राह्मणले भने — संसारमा तीन शत्रु छन्। आफ्ना गुणअनुसार तिनलाई नौ प्रकारका भनिएका छन्। उल्लास, सन्तोष र आनन्द — यी तीन गुण सत्त्वका हुन्।

Verse 2
Sanskrit

तृष्णा क्रोधोऽभिसंरम्भो राजसास्ते गुणाः स्मृताः। श्रमस्तन्द्रा च मोहश्च त्रयस्ते तामसा गुणाः॥

English

Cupidity, anger and hatred, these three qualitics said to belong Darkness. Lassitude, procrastination and delusion, these three qualities belong to Ignorance.

Hindi

लोभ, क्रोध और द्वेष — ये तीन गुण रजोगुण के कहे गए हैं। आलस्य, प्रमाद और मोह — ये तीन गुण तमोगुण के हैं।

Nepali

लोभ, क्रोध र द्वेष — यी तीन गुण रजोगुणका भनिएका छन्। आलस्य, प्रमाद र मोह — यी तीन गुण तमोगुणका हुन्।

Verse 3
Sanskrit

एतान् निकृत्य धृतिमान् बाणसंधैरतन्द्रितः। जेतुं परानुत्सहते प्रशान्तात्मा जितेन्द्रियः॥

English

Cutting these with showers of arrows, the intelligent man, free from idleness possessed of a tranquil soul, and with his senses under control, ventures to defeat others.

Hindi

बाणों की वर्षा से इन्हें काटकर आलस्य से रहित, शान्त आत्मा वाला और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला बुद्धिमान् पुरुष दूसरों को परास्त करने में समर्थ होता है।

Nepali

बाणको वर्षाले यिनलाई काटेर आलस्यरहित, शान्त आत्मा भएको र आफ्ना इन्द्रिय वशमा राख्ने बुद्धिमान् पुरुष अरूलाई परास्त गर्न समर्थ हुन्छ।

Verse 4
Sanskrit

अत्र गाथा: कीर्तयन्ति पुराकल्पविदो जनाः। अम्बरीषेण या गीता राज्ञा पूर्वं प्रशाम्यता॥

English

About it, persons conversant with ancient cycles recite some verses which were sung formerly by king Ambarisha who had acquired a tranquil soul.

Hindi

इस विषय में प्राचीन कल्पों के ज्ञाता कुछ ऐसे श्लोक कहते हैं जो पूर्वकाल में शान्त आत्मा वाले राजा अम्बरीष ने गाए थे।

Nepali

यस विषयमा प्राचीन कल्पका ज्ञाताहरूले केही यस्ता श्लोक भन्दछन् जो पूर्वकालमा शान्त आत्मा भएका राजा अम्बरीषले गाएका थिए।

Verse 5
Sanskrit

समुदीर्णेषु दोषेषु बाध्यमानेषु साधुषु। जग्राह तरसा राज्यमम्बरीषो महायशाः॥

English

When various kinds of faults were reigning supreme and when the righteous were afflicted, the illustrious Ambarisha put forth his strength for assuming sovereignty.

Hindi

जब नाना प्रकार के दोष प्रबल हो रहे थे और धर्मात्मा पीड़ित थे, तब यशस्वी अम्बरीष ने राज्य ग्रहण करने के लिए अपना बल प्रकट किया।

Nepali

जब नाना प्रकारका दोष प्रबल भइरहेका थिए र धर्मात्माहरू पीडित थिए, तब यशस्वी अम्बरीषले राज्य ग्रहण गर्नका लागि आफ्नो बल प्रकट गरे।

Verse 6
Sanskrit

स निगृह्यात्मनो दोषान् साधून् समभिपूज्य च। जगाम महतीं सिद्धिं गाथाश्चेमा जगाद ह॥

English

Subduing his own faults and adoring the righteous, he acquired great success and sang these verses.

Hindi

अपने दोषों का दमन करके और धर्मात्माओं का आदर करके उन्होंने महान् सिद्धि प्राप्त की और ये श्लोक गाए।

Nepali

आफ्ना दोषको दमन गरेर र धर्मात्माहरूको आदर गरेर उनले महान् सिद्धि प्राप्त गरे र यी श्लोक गाए।

Verse 7
Sanskrit

भूयिष्ठं विजिता दोषा निहताः सर्वशत्रवः। एको दोषो वरिष्ठश्च वध्यः स न हतो मया॥

English

I have controlled many faults. I have slain all enemies. But there is one, the greatest, vice which deserves to be destroyed but which has not been destroyed be me.

Hindi

मैंने अनेक दोषों पर विजय पाई है। मैंने समस्त शत्रुओं का वध किया है। किन्तु एक सबसे बड़ा दोष है जो नष्ट किए जाने योग्य है, पर जिसे मैंने अब तक नष्ट नहीं किया।

Nepali

मैले अनेक दोषमाथि विजय पाएको छु। मैले सम्पूर्ण शत्रुको वध गरेको छु। तर एउटा सबैभन्दा ठूलो दोष छ जो नष्ट गरिनुपर्ने छ, तर जसलाई मैले अहिलेसम्म नष्ट गरेको छैन।

Verse 8
Sanskrit

यत्प्रयुक्तो जन्तुरयं वैतृष्ण्यं नाधिगच्छति। तृष्णात इह निम्नानि धावमानो न बुध्यते॥

English

Urged by that fault, this individual soul fails to attain to freedom from desire. Possessed by desire, one runs into ditches without knowing it.

Hindi

उसी दोष से प्रेरित होकर यह जीवात्मा निष्कामता को प्राप्त नहीं कर पाता। कामना से ग्रस्त मनुष्य बिना जाने ही गड्ढों में जा गिरता है।

Nepali

त्यसै दोषले प्रेरित भई यो जीवात्माले निष्कामता प्राप्त गर्न सक्दैन। कामनाले ग्रस्त मानिस नजानीकनै खाल्डोमा गएर खस्दछ।

Verse 9
Sanskrit

अकार्यमपि येनेह प्रयुक्तः सेवते नरः। तं लोभमसिभिस्तीक्ष्णैनिकृत्य सुखमेधते॥

English

Urged by that fault, one induigcs in forbidden deeds. Do you cut off, cut off, that cupidity with sharp-edged swords.

Hindi

उसी दोष से प्रेरित होकर मनुष्य निषिद्ध कर्मों में प्रवृत्त होता है। तुम उस लोभ को तीक्ष्ण धार वाली तलवारों से काटो, काट डालो।

Nepali

त्यसै दोषले प्रेरित भई मानिस निषिद्ध कर्ममा प्रवृत्त हुन्छ। तिमी त्यस लोभलाई तीक्ष्ण धार भएका तरवारले काट, काटिदेऊ।

Verse 10
Sanskrit

लोभाद्धि जायते तृष्णा ततश्चिन्ता प्रवर्तते। स लिप्यमानो लभते भूयिष्ठं राजसान् गुणान्। तदवाप्तौ तु लभते भूयिष्ठं तामसान् गुणान्॥

English

From cupidity originates desire. From desire originates anxiety. The man who yields to desire acquires many qualities which bclong 10 Darkness,

Hindi

लोभ से कामना उत्पन्न होती है। कामना से चिन्ता उत्पन्न होती है। जो मनुष्य कामना के वश में हो जाता है, वह रजोगुण के अनेक गुण प्राप्त कर लेता है।

Nepali

लोभबाट कामना उत्पन्न हुन्छ। कामनाबाट चिन्ता उत्पन्न हुन्छ। जो मानिस कामनाको वशमा पर्दछ, उसले रजोगुणका अनेक गुण प्राप्त गर्दछ।

Verse 11
Sanskrit

स तैर्गुणैः संहतदेहबन्धनः पुनः पुनजार्यति कर्म चेहते। जन्मक्षये भिन्नविकीर्णदेहो मृत्युं पुनर्गच्छति जन्मनैव॥

English

When these have been acquired, he gets many qualities which belong to ignorance. On account of the qualities, he repeatedly takes birth, with the fetters of body united, and is moved to action. Upon the expiration of life, with body becoming separated and scattered, he once mects with death which is due to birth itself.

Hindi

जब ये प्राप्त हो जाते हैं, तब वह तमोगुण के अनेक गुण भी पा लेता है। उन गुणों के कारण वह शरीर के बन्धनों से जुड़ा हुआ बार-बार जन्म लेता है और कर्म में प्रवृत्त होता है। आयु के समाप्त होने पर, शरीर के पृथक् होकर बिखर जाने पर, वह पुनः उस मृत्यु को प्राप्त होता है जो जन्म के ही कारण होती है।

Nepali

जब यी प्राप्त हुन्छन्, तब उसले तमोगुणका अनेक गुण पनि पाउँछ। ती गुणका कारण ऊ शरीरका बन्धनसँग जोडिएर पटक-पटक जन्म लिन्छ र कर्ममा प्रवृत्त हुन्छ। आयु समाप्त भएपछि, शरीर पृथक् भई छरिएपछि, ऊ पुनः त्यस मृत्युलाई प्राप्त हुन्छ जो जन्मकै कारण हुन्छ।

Verse 12
Sanskrit

तस्मादेतं सम्यगवेक्ष्य लोभं निगृह्य धृत्याऽऽत्मनि राज्यमिच्छेत्। मात्मैव राजा विदितो यथावत्॥

English

Hence, duly understanding this, and governing cupidity by intelligence, one should desire for sovereignty in his soul. This is (true) sovereignty. There is no other sovereignty here. The soul properly understood, is the king.

Hindi

अतः इसे भलीभाँति समझकर और बुद्धि के द्वारा लोभ को वश में करके मनुष्य को अपनी आत्मा में ही राज्य की कामना करनी चाहिए। यही (सच्चा) राज्य है। यहाँ इसके अतिरिक्त कोई राज्य नहीं है। ठीक-ठीक समझी हुई आत्मा ही राजा है।

Nepali

त्यसैले यसलाई राम्ररी बुझेर र बुद्धिद्वारा लोभलाई वशमा गरेर मानिसले आफ्नै आत्मामा राज्यको कामना गर्नुपर्दछ। यही नै (साँचो) राज्य हो। यहाँ यसबाहेक कुनै राज्य छैन। ठीकसँग बुझिएको आत्मा नै राजा हो।

Verse 13
Sanskrit

इति राज्ञाम्बरीषेण गाथा गीता यशस्विना। अधिराज्यं पुरस्कृत्य लोभमेकं निकृन्तता॥

English

Even these were thc verses sung by the illustrious king Ambarisha, on the subject of sovereignty which he kept before him, that king who had severed the one foremost fault, viz.. cupidity.

Hindi

राज्य के विषय में, जिसे उन्होंने अपने सम्मुख रखा था, यशस्वी राजा अम्बरीष ने ये ही श्लोक गाए थे — उन राजा ने, जिन्होंने एक प्रधान दोष, अर्थात् लोभ को काट डाला था।

Nepali

राज्यका विषयमा, जसलाई उनले आफ्नो सामु राखेका थिए, यशस्वी राजा अम्बरीषले यिनै श्लोक गाएका थिए — ती राजाले, जसले एउटा प्रधान दोष, अर्थात् लोभलाई काटिदिएका थिए।