जनमेजय उवाच यदिदं शोचितं राज्ञाधृतराष्ट्रेण वै मुरे। प्रव्राज्य पाण्डवान् वीरान् सर्वमेतन्निरर्थकम्॥
Janamejaya said : O (Muni), king Dhritarashtra must uselessly have lamented after having sent the heroic sons of Pandu into exile.
जनमेजय ने कहा — हे (मुनि), वीर पाण्डुपुत्रों को वनवास भेजकर राजा धृतराष्ट्र ने निष्फल ही विलाप किया होगा।
जनमेजयले भने — हे (मुनि), वीर पाण्डुपुत्रहरूलाई वनवास पठाएर राजा धृतराष्ट्रले निष्फल नै विलाप गरेका हुनुपर्छ।