एवमुक्ता मुनिश्रेष्ठ मरुदं दुःखितो भृशं। अथ ध्यात्वा मुहूर्तं तु भगवानिदमब्रवीत्।।4.62.1।।
'When thus I spoke to the venerable sage in that manner roaring very painfully the divine sage replied after reflecting silently for a moment:
'जब मैंने अत्यन्त पीड़ा से कराहते हुए पूज्य मुनि से इस प्रकार कहा, तब दिव्य मुनि ने क्षणभर मौन रहकर विचार करने के पश्चात् उत्तर दिया —
'जब मैले अत्यन्त पीडाले कन्दै पूज्य मुनिसँग यसरी भनेँ, तब दिव्य मुनिले क्षणभर मौन रही विचार गरेपछि उत्तर दिए —