संस्कृत
अणीमाण्डव्य उवाच अल्पेऽपराधेऽपि महान् मम दण्डस्त्वया कृतः। शूद्रयोनावतो धर्म मानुषः सम्भविष्यसि। मर्यादां स्थापयाम्यद्य लोके धर्मफलोदयाम्॥ आ चतुर्दशकाद् वर्षान्न भविष्यति पातकम्। परतः कुर्वतामेवं दोष एव भविष्यति॥
अङ्ग्रेजी
Animandavya said : You have inflicted upon me a great punishment for a little fault. Therefore o Dharma, you will be born as a man in the womb of a Shudra woman. I establish this rule today on earth in respect of the consequences of one's act that no sin will be committed in any act done by a man below the age of fourteen years. When committed only above that age, it will be sin.”
हिन्दी
अणीमाण्डव्य ने कहा — एक तनिक-से दोष के लिए तुमने मुझ पर इतना बड़ा दण्ड लगाया है। इसलिए हे धर्म, तुम शूद्रा स्त्री के गर्भ में मनुष्य के रूप में जन्म लोगे। मैं आज पृथ्वी पर कर्मफल के विषय में यह नियम स्थापित करता हूँ कि चौदह वर्ष से कम आयु के मनुष्य द्वारा किए गए किसी कर्म में पाप नहीं लगेगा। उस आयु से ऊपर किए जाने पर ही वह पाप होगा।
नेपाली
अणीमाण्डव्यले भने — एउटा सानो दोषका लागि तिमीले ममाथि यति ठूलो दण्ड लगायौ। त्यसैले हे धर्म, तिमी शूद्रा स्त्रीको गर्भमा मानिसका रूपमा जन्म लिनेछौ। म आज पृथ्वीमा कर्मफलका विषयमा यो नियम स्थापित गर्छु कि चौध वर्षभन्दा कम उमेरका मानिसले गरेको कुनै कर्ममा पाप लाग्नेछैन। त्यस उमेरभन्दा माथि गरिएमा मात्र त्यो पाप हुनेछ।