अध्याय 11

विश्वरूपदर्शनयोग

एघारौँ अध्याय "विश्वरूप दर्शन योग" मा अर्जुनले दिव्य चक्षु पाएर भगवान्को विराट विश्वरूप दर्शन गर्छन् र भयविह्वल भएर स्तुति गर्छन्।

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श्लोक 1 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम्। यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम

अङ्ग्रेजी

Arjuna said, By this explanation of the highest secret concerning the Self which Thou hast spoken, for the sake of blessing me, my delusion has been dispelled.

हिन्दी

अर्जुन ने कहा -- मुझ पर अनुग्रह करने के लिए जो परम गोपनीय, अध्यात्मविषयक वचन (उपदेश) आपके द्वारा कहा गया, उससे मेरा मोह दूर हो गया है।।

नेपाली

अर्जुनले भने — तपाईंले मेरा कल्याणका लागि अध्यात्मसम्बन्धी जुन परम गोप्य उपदेश दिनुभयो, त्यसले मेरो यो मोह नष्ट भएको छ।

श्लोक 2 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया। त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्

अङ्ग्रेजी

The origin and destruction of beings have been heard in detail from You, O lotus-eyed Lord, and also Your inexhaustible greatness.

हिन्दी

हे कमलनयन ! मैंने भूतों की उत्पत्ति और प्रलय आपसे विस्तारपूर्वक सुने हैं तथा आपका अव्यय माहात्म्य (प्रभाव) भी सुना है।।

नेपाली

हे कमलनयन! भूतहरूको उत्पत्ति र लय मैले तपाईंबाट विस्तारपूर्वक सुनेँ; तपाईंको अक्षय महिमा पनि सुनेँ।

श्लोक 3 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर। द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम

अङ्ग्रेजी

Now, O Supreme Lord, as Thou hast thus described Thyself, O Supreme Person, I wish to behold Thy divine form.

हिन्दी

हे परमेश्वर ! आप अपने को जैसा कहते हो, यह ठीक ऐसा ही है। (परन्तु) हे पुरुषोत्तम ! मैं आपके ईश्वरीय रूप को प्रत्यक्ष देखना चाहता हूँ।।

नेपाली

हे परमेश्वर! तपाईंले आफूलाई जुन रूपमा बताउनुभयो — हे पुरुषोत्तम! त्यो ईश्वरीय रूप म प्रत्यक्ष देख्न चाहन्छु।

श्लोक 4 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो। योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयाऽत्मानमव्ययम्

अङ्ग्रेजी

If Thou, O Lord, thinkest it possible for me to see it, do Thou, then, O Lord of the Yogis, show me Thy imperishable Self.

हिन्दी

हे प्रभो ! यदि आप मानते हैं कि मेरे द्वारा वह आपका रूप देखा जाना संभव है, तो हे योगेश्वर ! आप अपने अव्यय रूप का दर्शन कराइये।।

नेपाली

हे प्रभु! त्यो रूप हेर्न मेरो सामर्थ्य छ भनी ठान्नुहुन्छ भने, हे योगेश्वर! आफ्नो त्यो अव्यय रूप मलाई देखाउनुहोस्।

श्लोक 5 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

श्री भगवानुवाच पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्रशः। नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च

अङ्ग्रेजी

The Blessed Lord said, "Behold, O Arjuna, forms of Mine, by the hundreds and thousands, of different sorts, divine, and of various colors and shapes."

हिन्दी

श्रीभगवान् ने कहा -- हे पार्थ ! मेरे सैकड़ों तथा सहस्रों नाना प्रकार के और नाना वर्ण तथा आकृति वाले दिव्य रूपों को देखो।।

नेपाली

श्रीभगवान्ले भने — हे पार्थ! मेरा सयौँ-हजारौँ नानाविध, दिव्य, अनेक रङ र अनेक आकारका रूपहरू हेर।

श्लोक 6 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्िवनौ मरुतस्तथा। बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याऽश्चर्याणि भारत

अङ्ग्रेजी

Behold the Adityas, the Vasus, the Rudras, the two Asvins, and the Maruts; behold many wonders never before seen, O Arjuna.

हिन्दी

हे भारत ! (मुझमें) आदित्यों, वसुओं, रुद्रों तथा अश्विनीकुमारों और मरुद्गणों को देखो, तथा और भी अनेक इसके पूर्व कभी न देखे हुए आश्चर्यों को देखो।।

नेपाली

आदित्यहरू, वसुहरू, रुद्रहरू, दुई अश्विनीकुमार र मरुद्गणलाई हेर; हे भारत! पहिले कहिल्यै नदेखिएका अनेक आश्चर्यहरू पनि हेर।

श्लोक 7 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्। मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टुमिच्छसि

अङ्ग्रेजी

Now, behold, O Arjuna, in this My body, the entire universe centered in one, including the moving and the unmoving, and whatever else you desire to see.

हिन्दी

हे गुडाकेश ! आज (अब) इस मेरे शरीर में एक स्थान पर स्थित हुए चराचर सहित सम्पूर्ण जगत् को देखो तथा और भी जो कुछ तुम देखना चाहते हो, उसे भी देखो।।

नेपाली

हे गुडाकेश! अहिले मेरो यस शरीरमा एकठाउँमा रहेको चराचर सहितको सम्पूर्ण जगत् हेर र जे तिमी देख्न चाहन्छौ, त्यो पनि हेर।

श्लोक 8 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा। दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम्

अङ्ग्रेजी

But you are not able to behold Me with these your own eyes; I give you the divine eye; behold My lordly Yoga.

हिन्दी

परन्तु तुम अपने इन्हीं (प्राकृत) नेत्रों के द्वारा मुझे देखने में समर्थ नहीं हो; (इसलिए) मैं तुम्हें दिव्यचक्षु देता हूँ, जिससे तुम मेरे ईश्वरीय 'योग' को देखो।।

नेपाली

तर तिमी आफ्ना यी आँखाहरूले मलाई हेर्न सक्दैनौ; म तिमीलाई दिव्य चक्षु दिन्छु — मेरो ईश्वरीय योग हेर।

श्लोक 9 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

सञ्जय उवाच एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः। दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम्

अङ्ग्रेजी

Sanjaya said, Having thus spoken, O king, the great Lord of Yoga, Hari (Krishna), showed Arjuna His supreme form as the Lord.

हिन्दी

संजय ने कहा -- हे राजन् ! महायोगेश्वर हरि ने इस प्रकार कहकर फिर अर्जुन के लिए परम ऐश्वर्ययुक्त रूप को दर्शाया।।

नेपाली

सञ्जयले भने — हे राजन्! यसरी भनेर महायोगेश्वर हरि कृष्णले अर्जुनलाई आफ्नो परम ऐश्वर्य-रूप देखाउनुभयो।

श्लोक 10 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम्। अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम्

अङ्ग्रेजी

With numerous mouths and eyes, with numerous wondrous sights, with numerous divine adornments, with numerous divine weapons uplifted, such a form He showed.

हिन्दी

उस अनेक मुख और नेत्रों से युक्त तथा अनेक अद्भुत दर्शनों वाले एवं बहुत से दिव्य भूषणों से युक्त और बहुत से दिव्य शस्त्रों को हाथों में उठाये हुये।।

नेपाली

अनेक मुख र आँखा, अनेक अद्भुत दर्शन, अनेक दिव्य आभूषण र अनेक दिव्य उठाइएका शस्त्रहरूले युक्त त्यो रूप उहाँले देखाउनुभयो।

श्लोक 11 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्। सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम्

अङ्ग्रेजी

Wearing divine garlands and apparel, anointed with divine unguents, the all-wonderful, resplendent Being is endless with faces on all sides.

हिन्दी

दिव्य माला और वस्त्रों को धारण किये हुये और दिव्य गन्ध का लेपन किये हुये एवं समस्त प्रकार के आश्चर्यों से युक्त अनन्त, विश्वतोमुख (विराट् स्वरूप) परम देव (को अर्जुन ने देखा)।।

नेपाली

दिव्य माला र वस्त्र, दिव्य गन्ध लेपित, सर्व आश्चर्यमय, तेजोमय, अनन्त, सर्वतोमुख त्यो स्वरूप त्यहाँ प्रकट भयो।

श्लोक 12 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता। यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः

अङ्ग्रेजी

If the splendour of a thousand suns were to blaze out simultaneously in the sky, that would be the splendour of that mighty being.

हिन्दी

आकाश में सहस्र सूर्यों के एक साथ उदय होने से उत्पन्न जो प्रकाश होगा, वह उस (विश्वरूप) परमात्मा के प्रकाश के सदृश होगा।।

नेपाली

आकाशमा एकैसाथ हजार सूर्य उदाएझैँ हुने प्रकाश पनि त्यो महान् पुरुषको तेजको समान सायदै होस्।

श्लोक 13 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा। अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा

अङ्ग्रेजी

There, in the body of the God of gods, Arjuna then saw the entire universe resting in one, with its myriad of divisions.

हिन्दी

पाण्डुपुत्र अर्जुन ने उस समय अनेक प्रकार से विभक्त हुए सम्पूर्ण जगत् को देवों के देव श्रीकृष्ण के शरीर में एक स्थान पर स्थित देखा।।

नेपाली

त्यतिबेला अर्जुनले देवदेवको शरीरमा अनेक भागमा विभक्त सम्पूर्ण जगत् एकठाउँमा अवस्थित देखे।

श्लोक 14 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः। प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत

अङ्ग्रेजी

Then, Arjuna, filled with wonder and his hair standing on end, bowed his head to the God and spoke with palms joined.

हिन्दी

उसके उपरान्त वह आश्चर्यचकित हुआ हर्षित रोमों वाला (जिसे रोमांच का अनुभव हो रहा हो) धनंजय अर्जुन विश्वरूप देव को (श्रद्धा भक्ति सहित) शिर से प्रणाम करके हाथ जोड़कर बोला।।

नेपाली

अनि आश्चर्यले परिपूर्ण, रोमाञ्चित अर्जुनले शीरले प्रणाम गर्दै हात जोडेर भगवान्सँग यसो भने।

श्लोक 15 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अर्जुन उवाच पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान्। ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थ मृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान्

अङ्ग्रेजी

Arjuna said, "O God, I see all the gods in Your body, as well as hosts of various classes of beings, Brahma the Lord seated on the lotus, all the sages, and the celestial serpents."

हिन्दी

अर्जुन ने कहा -- हे देव! मैं आपके शरीर में समस्त देवों को तथा अनेक भूतविशेषों के समुदायों को और कमलासन पर स्थित सृष्टि के स्वामी ब्रह्माजी को, ऋषियों को और दिव्य सर्पों को देख रहा हूँ।।

नेपाली

अर्जुनले भने — हे देव! म तपाईंको शरीरमा सबै देवता, अनेक भूत-समुदाय, कमलासन ब्रह्मा, सबै ऋषिहरू र दिव्य सर्पहरू देख्दै छु।

श्लोक 16 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रं पश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम्। नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप

अङ्ग्रेजी

I see You with boundless form on every side, with many arms, stomachs, mouths, and eyes; neither the end nor the middle nor the beginning do I see, O Lord of the Universe, O Cosmic Form.

हिन्दी

हे विश्वेश्वर! मैं आपकी अनेक बाहु, उदर, मुख और नेत्रों से युक्त तथा सब ओर से अनन्त रूपों वाला देखता हूँ। हे विश्वरूप! मैं आपके न अन्त को देखता हूँ और न मध्य को और न आदि को।।

नेपाली

धेरै बाहु, उदर, मुख र आँखासहित सर्वत्र अनन्त रूप देख्दै छु; हे विश्वेश्वर! हे विश्वरूप! तपाईंको न आदि, न मध्य, न अन्त्य देख्छु।

श्लोक 17 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतोदीप्तिमन्तम्। पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ता द्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम्

अङ्ग्रेजी

I see You with the diadem, club, and discus, a mass of radiance shining everywhere, very hard to look at, blazing all around like a burning fire and the sun, and immeasurable.

हिन्दी

मैं आपका मुकुटयुक्त, गदायुक्त और चक्रधारण किये हुये तथा सब ओर से प्रकाशमान् तेज का पुंज, दीप्त अग्नि और सूर्य के समान ज्योतिर्मय, देखने में अति कठिन और अप्रमेयस्वरूप सब ओर से देखता हूँ।।

नेपाली

मुकुट, गदा र चक्र, सबैतिर तेजोराशि, हेर्नै नसक्ने, प्रज्वलित अग्नि र सूर्यझैँ देदीप्यमान, अप्रमेय — यस्तो स्वरूप देख्दै छु।

श्लोक 18 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्। त्वमव्ययः शाश्वतधर्मगोप्ता सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे

अङ्ग्रेजी

You are the Imperishable, the Supreme Being, worthy of being known. You are the great treasure-house of this universe; You are the imperishable protector of the eternal Dharma; You are the Primal Person, I believe.

हिन्दी

आप ही जानने योग्य (वेदितव्यम्) परम अक्षर हैं; आप ही इस विश्व के परम आश्रय (निधान) हैं ! आप ही शाश्वत धर्म के रक्षक हैं और आप ही सनातन पुरुष हैं,ऐसा मेरा मत है।।

नेपाली

तपाईं नै अक्षर परम तत्त्व जान्नुपर्ने हुनुहुन्छ; तपाईं नै यस विश्वको परम निधान हुनुहुन्छ; तपाईं नै अव्यय, सनातन धर्मको रक्षक, सनातन पुरुष हुनुहुन्छ — यो मेरो मत हो।

श्लोक 19 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्य मनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम्। पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रम् स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम्

अङ्ग्रेजी

I see You without beginning, middle, or end, infinite in power, with endless arms, the sun and moon as Your eyes, the burning fire Your mouth, heating the entire universe with Your radiance.

हिन्दी

मैं आपको आदि, अन्त और मध्य से रहित तथा अनंत सार्मथ्य से युक्त और अनंत बाहुओं वाला तथा चन्द्रसूर्यरूपी नेत्रों वाला और दीप्त अग्निरूपी मुख वाला तथा अपने तेज से इस विश्व को तपाते हुए देखता हूँ।।

नेपाली

अनादि, मध्य र अन्त्यरहित, अनन्त बल, अनन्त बाहु, सूर्य-चन्द्ररूपी नेत्र, प्रदीप्त अग्निरूपी मुख, आफ्नो तेजले सम्पूर्ण जगत्लाई तपाउने तपाईंलाई म देख्दै छु।

श्लोक 20 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः। दृष्ट्वाऽद्भुतं रूपमुग्रं तवेदं लोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन्

अङ्ग्रेजी

This space between the earth and the heavens, and all the quarters, is filled by You alone; having seen this, Your wonderful and terrible form, the three worlds are trembling with fear, O great-souled Being.

हिन्दी

हे महात्मन् ! स्वर्ग और पृथ्वी के मध्य का यह आकाश तथा समस्त दिशाएं अकेले आप से ही व्याप्त हैं; आपके इस अद्भुत और उग्र रूप को देखकर तीनों लोक अतिव्यथा (भय) को प्राप्त हो रहे हैं।।

नेपाली

स्वर्ग र पृथ्वीको बीचको आकाश र सम्पूर्ण दिशा एकमात्र तपाईंले व्याप्त गर्नुभएको छ; हे महात्मा! तपाईंको यो अद्भुत र भयङ्कर रूप देखेर तीनै लोक काँपिरहेका छन्।

श्लोक 21 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अमी हि त्वां सुरसङ्घाः विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति। स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः

अङ्ग्रेजी

Verily, these hosts of gods enter into Thee; some extol Thee with joined palms in fear, saying, 'May it be well!' Bands of great sages and perfected ones praise Thee with complete hymns.

हिन्दी

ये समस्त देवताओं के समूह आप में ही प्रवेश कर रहे हैं और कई एक भयभीत होकर हाथ जोड़े हुए आप की स्तुति करते हैं; महर्षि और सिद्धों के समुदाय 'कल्याण होवे' (स्वस्तिवाचन करते हुए) ऐसा कहकर, उत्तम (या सम्पूर्ण) स्रोतों द्वारा आपकी स्तुति करते हैं।।

नेपाली

देवताका समूह तपाईंमा प्रवेश गर्दै छन्; कोही भयभीत भएर हात जोडेर 'स्वस्ति होस्' भन्दै तपाईंको स्तुति गर्छन्; महर्षि र सिद्धहरूका समूहले पनि पूर्ण स्तोत्रद्वारा तपाईंको स्तुति गर्छन्।

श्लोक 22 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्िवनौ मरुतश्चोष्मपाश्च। गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे

अङ्ग्रेजी

The Rudras, Adityas, Vasus, Sadhyas, Visvedevas, the two Asvins, Maruts, the Manus, and the hosts of celestial singers, Yakshas, demons, and the perfected ones, all look upon Thee with great amazement.

हिन्दी

रुद्रगण, आदित्य, वसु और साध्यगण, विश्वेदेव तथा दो अश्विनीकुमार, मरुद्गण और उष्मपा, गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धगणों के समुदाय- ये सब ही विस्मित होते हुए आपको देखते हैं।।

नेपाली

रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, दुई अश्विन, मरुद्गण, पितृ, गन्धर्व, यक्ष, असुर र सिद्धहरूका समूहले विस्मित भएर तपाईंलाई हेरिरहेका छन्।

श्लोक 23 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

रूपं महत्ते बहुवक्त्रनेत्रं महाबाहो बहुबाहूरुपादम्। बहूदरं बहुदंष्ट्राकरालं दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाऽहम्

अङ्ग्रेजी

Having seen Your immeasurable form with many mouths and eyes, O mighty-armed one, with many arms, thighs, and feet, with many stomachs and fearsome with many teeth, the worlds are terrified, and so am I.

हिन्दी

हे महाबाहो! आपके बहुत मुख तथा नेत्र वाले, बहुत बाहु, उरु (जंघा) तथा पैरों वाले, बहुत-ंंसी उदरों वाले तथा बहुतसी विकराल दाढ़ों वाले महान् रूप को देखकर सब लोग व्यथित हो रहे हैं और उसी प्रकार मैं भी (व्याकुल हो रहा हूँ)।।

नेपाली

हे महाबाहु! अनेक मुख, आँखा, बाहु, जङ्घा, पाउँ, उदर र भयङ्कर दाँतयुक्त तपाईंको त्यो विशाल रूप देखेर लोक र म पनि व्याकुल भएका छौँ।

श्लोक 24 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम्। दृष्ट्वा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्मा धृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो

अङ्ग्रेजी

On seeing Thee, touching the sky, shining in many colors, with mouths wide open, with large fiery eyes, I am terrified at heart and find neither courage nor peace, O Vishnu.

हिन्दी

हे विष्णो! आकाश के साथ स्पर्श किये हुए देदीप्यमान अनेक रूपों से युक्त तथा विस्तरित मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों से युक्त आपको देखकर भयभीत हुआ मैं धैर्य और शान्ति को नहीं प्राप्त हो रहा हूँ।।

नेपाली

हे विष्णु! आकाशमा छोएको, अनेक रङले शोभित, मुख खोलेको, विशाल जलजल आँखाले युक्त तपाईंलाई देखेर मेरो मन व्याकुल छ; न धैर्य, न शान्ति पाउँदै छु।

श्लोक 25 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

दंष्ट्राकरालानि च ते मुखानि दृष्ट्वैव कालानलसन्निभानि। दिशो न जाने न लभे च शर्म प्रसीद देवेश जगन्निवास

अङ्ग्रेजी

Having seen Thy mouths fearful with teeth blazing like the fires of cosmic dissolution, I know not the four quarters, nor do I find peace. Have mercy, O Lord of the gods, O abode of the universe.

हिन्दी

आपके विकराल दाढ़ों वाले और प्रलयाग्नि के समान प्रज्वलित मुखों को देखकर, मैं न दिशाओं को जान पा रहा हूँ और न शान्ति को प्राप्त हो रहा हूँ; इसलिए हे देवेश!  हे जगन्निवास! आप प्रसन्न हो जाइए।।

नेपाली

कालाग्निझैँ प्रज्वलित दाँतहरू भएका तपाईंका मुखहरू देखेर म दिशा भुलेको छु, शान्ति पाउँदै छैन। हे देवेश! हे जगन्निवास! प्रसन्न हुनुहोस्।

श्लोक 26 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः। भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथाऽसौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः

अङ्ग्रेजी

All the sons of Dhritarashtra, along with the hosts of kings of the earth, Bhishma, Drona, and Karna, as well as the chief among our warriors.

हिन्दी

और ये समस्त धृतराष्ट्र के पुत्र राजाओं के समुदाय सहित आप में प्रवेश करते हैं। भीष्म, द्रोण तथा कर्ण और हमारे पक्ष के भी प्रधान योद्धाओं के सहित.।।

नेपाली

धृतराष्ट्रका सबै पुत्र, राजाहरूका समूह, भीष्म, द्रोण, सूतपुत्र कर्ण र हाम्रा प्रमुख योद्धाहरू पनि —

श्लोक 27 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि। केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु संदृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः

अङ्ग्रेजी

Some hurry into Your mouths with their terrible teeth, fearful to behold. Some are found stuck in the gaps between the teeth, their heads crushed to powder.

हिन्दी

तीव्र वेग से आपके विकराल दाढ़ों वाले भयानक मुखों में प्रवेश करते हैं और कई एक चूर्णित शिरों सहित आपके दांतों के बीच में फँसे हुए दिख रहे हैं।।

नेपाली

विकराल दाँतयुक्त डरलाग्दा तपाईंका मुखमा कोही दौडँदै प्रवेश गर्दै छन्, कोही दाँतहरूका बीचमा शीर चुर्न भएको हालतमा अड्किरहेका छन्।

श्लोक 28 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखाः द्रवन्ति। तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति

अङ्ग्रेजी

Verily, just as many torrents of rivers flow towards the ocean, so too these heroes in the world of men enter Thy flaming mouths.

हिन्दी

जैसे नदियों के बहुत से जलप्रवाह समुद्र की ओर वेग से बहते हैं, वैसे ही मनुष्यलोक के ये वीर योद्धागण आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश करते हैं।।

नेपाली

जसरी नदीका धेरै प्रवाह वेगपूर्वक समुद्रमा प्रवेश गर्छन्, त्यसरी नै यी नरश्रेष्ठ वीरहरू तपाईंका प्रज्वलित मुखमा प्रवेश गर्दै छन्।

श्लोक 29 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः। तथैव नाशाय विशन्ति लोका स्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः

अङ्ग्रेजी

As moths hurriedly rush into a blazing fire, leading to their own destruction, so too these creatures hurry into Your mouths, leading to their own destruction.

हिन्दी

जैसे पतंगे अपने नाश के लिए प्रज्वलित अग्नि में अतिवेग से प्रवेश करते हैं, वैसे ही ये लोग भी अपने नाश के लिए आपके मुखों में अतिवेग से प्रवेश करते हैं।।

नेपाली

जसरी पुतलीहरू आफ्नै नाशका लागि वेगपूर्वक प्रज्वलित आगोमा पस्छन्, त्यसरी नै यी सम्पूर्ण लोक पनि आफ्नो नाशका लागि वेगपूर्वक तपाईंका मुखमा पस्दै छन्।

श्लोक 30 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ता ल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः। तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो

अङ्ग्रेजी

Thou lickest up, devouring all the worlds on every side with Thy flaming mouths. Thy fierce rays, filling the whole world with radiance, burn, O Vishnu!

हिन्दी

हे विष्णो! आप प्रज्वलित मुखों के द्वारा इन समस्त लोकों का ग्रसन करते हुए आस्वाद ले रहे हैं, आपका उग्र प्रकाश सम्पूर्ण जगत् को तेज के द्वारा परिपूर्ण करके तपा रहा है।।

नेपाली

हे विष्णु! तपाईं सबैतिरबाट प्रज्वलित मुखहरूले लोकलाई ग्रास गर्दै हुनुहुन्छ; तपाईंका उग्र किरणहरूले सम्पूर्ण जगत्लाई तेजले भरेर तपाउँदै छन्।

श्लोक 31 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद। विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्

अङ्ग्रेजी

Tell me, who you are, so fierce of form. I offer my salutations to you, O God Supreme; have mercy on me. I desire to know you, the original Being. I do not indeed know your workings.

हिन्दी

(कृपया) मेरे प्रति कहिये, कि उग्ररूप वाले आप कौन हैं? हे देवों में श्रेष्ठ! आपको नमस्कार है, आप प्रसन्न होइये। आदि स्वरूप आपको मैं (तत्त्व से) जानना चाहता हूँ, क्योंकि आपकी प्रवृत्ति (अर्थात् प्रयोजन को) को मैं नहीं समझ पा रहा हूँ।।

नेपाली

मलाई बताउनुहोस् — यस्तो उग्र रूपवाला तपाईं को हुनुहुन्छ? हे देवश्रेष्ठ! तपाईंलाई नमस्कार छ, प्रसन्न हुनुहोस्; आदिस्वरूप तपाईंलाई जान्न चाहन्छु; तपाईंको प्रवृत्ति म जान्दिनँ।

श्लोक 32 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

श्री भगवानुवाच कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः। ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः

अङ्ग्रेजी

The Blessed Lord said, "I am the full-grown, world-destroying Time, now engaged in destroying the worlds. Even without you, none of the warriors arrayed in the hostile armies will live."

हिन्दी

श्रीभगवान् ने कहा -- मैं लोकों का नाश करने वाला प्रवृद्ध काल हूँ। इस समय, मैं इन लोकों का संहार करने में प्रवृत्त हूँ। जो प्रतिपक्षियों की सेना में स्थित योद्धा हैं, वे सब तुम्हारे बिना भी नहीं रहेंगे।।

नेपाली

श्रीभगवान्ले भने — म लोकहरूलाई संहार गर्ने महाकाल हुँ; अहिले लोकको संहारका लागि प्रवृत्त भएको छु। तिमीबाहेक पनि शत्रुसेनामा खडा एक पनि योद्धा बाँच्ने छैन।

श्लोक 33 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून् भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम्। मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्

अङ्ग्रेजी

Therefore, stand up and obtain fame. Conquer the enemies and enjoy the unparalleled kingdom. Verily, by Me they have already been slain; be thou a mere instrument, O Arjuna.

हिन्दी

इसलिए तुम उठ खड़े हो जाओ और यश को प्राप्त करो; शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य को भोगो। ये सब पहले से ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं। हे सव्यसाचिन्! तुम केवल निमित्त ही बनो।।

नेपाली

त्यसैले उठ, यश प्राप्त गर; शत्रुलाई जितेर समृद्ध राज्य भोग गर। यी सबै मैले पहिले नै मारिसकेको छु; हे सव्यसाची! तिमी केवल निमित्तमात्र बन।

श्लोक 34 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथाऽन्यानपि योधवीरान्। मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान्

अङ्ग्रेजी

Drona, Bhishma, Jayadratha, Karna, and other brave warriors have already been slain by Me; do not be distressed with fear; fight and you shall conquer your enemies in battle.

हिन्दी

द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण तथा और भी बहुत से मेरे द्वारा मारे गये वीर योद्धाओं को तुम मारो; भय मत करो; युद्ध करो; तुम युद्ध में शत्रुओं को जीतोगे।।

नेपाली

द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण र अरू सबै महान् योद्धा मैले पहिले नै मारिसकेका छु; तिमी मार। नडर, युद्ध गर; रणमा शत्रुहरूलाई तिमीले जित्ने छौ।

श्लोक 35 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

सञ्जय उवाच एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी। नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य

अङ्ग्रेजी

Sanjaya said, Having heard that speech of Lord Krishna, Arjuna, with joined palms, trembling, prostrated himself, again addressing Krishna in a choked voice, bowing down, overwhelmed with fear.

हिन्दी

संजय ने कहा -- केशव भगवान् के इस वचन को सुनकर मुकुटधारी अर्जुन हाथ जोड़े हुए, कांपता हुआ नमस्कार करके पुन: भयभीत हुआ श्रीकृष्ण के प्रति गद्गद् वाणी से बोला।।

नेपाली

सञ्जयले भने — केशवको त्यो वचन सुनेर हात जोडेर काँप्दै, प्रणाम गर्दै, पुनः-पुनः नमस्कार गर्दै, भयले व्याकुल भएर बोलाइले अड्किएका स्वरमा अर्जुनले श्रीकृष्णलाई यसो भने।

श्लोक 36 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अर्जुन उवाच स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत् प्रहृष्यत्यनुरज्यते च। रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसङ्घाः

अङ्ग्रेजी

Arjuna said, "It is fitting, O Krishna, that the world delights and rejoices in Your praise; demons fly in fear in all directions and the hosts of the perfected ones bow to You."

हिन्दी

अर्जुन ने कहा -- यह योग्य ही है कि आपके कीर्तन से जगत् अति हर्षित होता है और अनुराग को भी प्राप्त होता है। भयभीत राक्षस लोग समस्त दिशाओं में भागते हैं और समस्त सिद्धगणों के समुदाय आपको नमस्कार करते हैं।।

नेपाली

अर्जुनले भने — हे हृषीकेश! तपाईंको कीर्तिमा संसार हर्षित र अनुरक्त हुनु उचित नै हो; राक्षसहरू डराएर सबैतिर भाग्छन् र सिद्धहरूका समूहले तपाईंलाई नमस्कार गर्छन्।

श्लोक 37 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन् गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकर्त्रे। अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत्

अङ्ग्रेजी

And why should they not, O great Soul, bow to Thee Who art greater than all else, the primal cause even of the Creator (Brahma), O Infinite Being, O Lord of the gods, O Abode of the universe; Thou art the imperishable, the Being, the non-being, and That which is supreme—that which is beyond the Being and the non-being.

हिन्दी

हे महात्मन् ! ब्रह्मा के भी आदि कर्ता और सबसे श्रेष्ठ आपके लिए वे कैसे नमस्कार नहीं करें? (क्योंकि) हे अनन्त! हे देवेश! हे जगन्निवास! जो सत् असत् और इन दोनों से परे अक्षरतत्त्व है, वह आप ही हैं।।

नेपाली

हे महात्मा! तपाईं ब्रह्माको पनि आदिकारण, सर्वश्रेष्ठ हुनुहुन्छ; तपाईंलाई नमस्कार किन नगरुन्? हे अनन्त! हे देवेश! हे जगन्निवास! तपाईं सत् र असत् दुवै र तीभन्दा पर अक्षर हुनुहुन्छ।

श्लोक 38 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

त्वमादिदेवः पुरुषः पुराण स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्। वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूप

अङ्ग्रेजी

You are the primal God, the ancient Purusha, the supreme refuge of this universe, the knower, the knowable, and the supreme Abode. Through You, the universe is pervaded, O Being of infinite forms.

हिन्दी

आप आदिदेव और पुराण (सनातन) पुरुष हैं। आप इस जगत् के परम आश्रय, ज्ञाता, ज्ञेय, (जानने योग्य) और परम धाम हैं। हे अनन्तरूप आपसे ही यह विश्व व्याप्त है।।

नेपाली

तपाईं आदिदेव, पुरातन पुरुष, यस विश्वको परम शरण, ज्ञाता, ज्ञेय र परमधाम हुनुहुन्छ; हे अनन्तरूप! तपाईंले यो सम्पूर्ण विश्व व्याप्त गरेर रहनुभएको छ।

श्लोक 39 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च। नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते

अङ्ग्रेजी

You are Vayu, Yama, Agni, Varuna, the moon, the Creator, and the great-grandfather. I offer my salutations to You a thousand times, and again I offer my salutations to You.

हिन्दी

आप वायु, यम, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, प्रजापति (ब्रह्मा) और प्रपितामह (ब्रह्मा के भी कारण) हैं; आपके लिए सहस्र बार नमस्कार, नमस्कार है, पुन: आपको बारम्बार नमस्कार, नमस्कार है।।

नेपाली

तपाईं वायु, यम, अग्नि, वरुण, चन्द्र, प्रजापति र प्रपितामह हुनुहुन्छ; तपाईंलाई हजारौँ नमस्कार छ; नमस्कार-नमस्कार छ।

श्लोक 40 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व। अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः

अङ्ग्रेजी

Salutations to You in front and behind! Salutations to You on every side! O All! You, infinite in power and prowess, pervade all; therefore You are all.

हिन्दी

हे अनन्तसार्मथ्य वाले भगवन्! आपके लिए अग्रत: और पृष्ठत: नमस्कार है, हे सर्वात्मन्! आपको सब ओर से नमस्कार है। आप अमित विक्रमशाली हैं और आप सबको व्याप्त किये हुए हैं, इससे आप सर्वरूप हैं।।

नेपाली

अघि र पछि नमस्कार छ; हे सर्व! सबैतिरबाट नमस्कार छ; तपाईं अनन्त वीर्य र विक्रमवाला, सबैतिर व्याप्त — त्यसैले तपाईं नै सर्व हुनुहुन्छ।

श्लोक 41 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति। अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि

अङ्ग्रेजी

Whatever I have presumptuously said from carelessness or love, addressing You as O Krishna! O Yadava! O Friend! regarding You merely as a friend, unknowing of Your greatness.

हिन्दी

हे भगवन्! आपको सखा मानकर आपकी इस महिमा को न जानते हुए मेरे द्वारा प्रमाद से अथवा प्रेम से भी "हे कृष्ण हे! यादव हे सखे!" इस प्रकार जो कुछ बलात् कहा गया है।।

नेपाली

तपाईंको यो महिमा नजानेर मैले 'हे कृष्ण', 'हे यादव', 'हे साथी' भनेर साथी मानेर प्रेम वा प्रमादले जे जे अनुचित बोलेँ —

श्लोक 42 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

यच्चावहासार्थमसत्कृतोऽसि विहारशय्यासनभोजनेषु। एकोऽथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम्

अङ्ग्रेजी

In whatever way I may have insulted You for the sake of fun, while at play, reposing, sitting, or at meals, when alone (with You), O Krishna, or in company, that I implore You, immeasurable one, to forgive.

हिन्दी

और, हे अच्युत! जो आप मेरे द्वारा हँसी के लिये बिहार, शय्या, आसन और भोजन के समय अकेले में अथवा अन्यों के समक्ष भी अपमानित किये गये हैं, उन सब के लिए अप्रमेय स्वरूप आप से मैं क्षमायाचना करता हूँ।।

नेपाली

हे अच्युत! हाँसो-खेलमा, सुत्दा, बस्दा, खाँदा, एक्लै वा अरूको सामु जे जे अपमान मैले गरेँ, हे अप्रमेय! ती सबैको म तपाईंसँग क्षमा माग्छु।

श्लोक 43 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

पितासि लोकस्य चराचरस्य त्वमस्य पूज्यश्च गुरुर्गरीयान्। न त्वत्समोऽस्त्यभ्यधिकः कुतोऽन्यो लोकत्रयेऽप्यप्रतिमप्रभाव

अङ्ग्रेजी

Thou art the Father of this world, both moving and unmoving. Thou art to be adored by this world; Thou, the greatest Guru; for none exists who is equal to Thee; how then could there be another superior to Thee in the three worlds, O Being of unrivaled power?

हिन्दी

आप इस चराचर जगत् के पिता, पूजनीय और सर्वश्रेष्ठ गुरु हैं। हे अप्रितम प्रभाव वाले भगवन्! तीनों लोकों में आपके समान भी कोई नहीं हैं, तो फिर आपसे अधिक श्रेष्ठ कैसे होगा?।।

नेपाली

तपाईं चराचर जगत्का पिता हुनुहुन्छ; तपाईं नै यस संसारका पूज्य परम गुरु हुनुहुन्छ; तपाईंसमान कोही छैन; हे अनुपम प्रभावशाली! तीनै लोकमा तपाईंभन्दा अधिक त कसरी सम्भव होस्?

श्लोक 44 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं प्रसादये त्वामहमीशमीड्यम्। पितेव पुत्रस्य सखेव सख्युः प्रियः प्रियायार्हसि देव सोढुम्

अङ्ग्रेजी

Therefore, bowing down and prostrating my body, I crave Thy forgiveness, O adorable Lord. As a father forgives his son, a friend his dear friend, a lover his beloved, even so may Thou forgive me, O God.

हिन्दी

इसलिये हे भगवन्! मैं शरीर के द्वारा साष्टांग प्रणिपात करके स्तुति के योग्य आप ईश्वर को प्रसन्न होने के लिये प्रार्थना करता हूँ। हे देव! जैसे पिता पुत्र के, मित्र अपने मित्र के और प्रिय अपनी प्रिया के(अपराध को क्षमा करता है), वैसे ही आप भी मेरे अपराधों को क्षमा कीजिये।।

नेपाली

त्यसैले शरीरलाई दण्डझैँ प्रणाम गरेर तपाईं स्तुत्य प्रभुसँग म प्रसन्नता माग्छु; जसरी पिताले छोरालाई, मित्रले मित्रलाई र पतिले पत्नीलाई सहन्छन्, त्यसरी तपाईंले मलाई सहनुहोस्।

श्लोक 45 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अदृष्टपूर्वं हृषितोऽस्मि दृष्ट्वा भयेन च प्रव्यथितं मनो मे। तदेव मे दर्शय देव रूपं प्रसीद देवेश जगन्निवास

अङ्ग्रेजी

I am delighted, having seen something never seen before; yet my mind is distressed with fear. Show me that form only, O God; have mercy, O God of gods, O Abode of the universe.

हिन्दी

मैं आपके इस अदृष्टपूर्व रूप को देखकर हर्षित हो रहा हूँ और मेरा मन भय से अतिव्याकुल भी हो रहा हैं। इसलिए हे देव! आप उस पूर्वकाल को ही मुझे दिखाइये। हे देवेश! हे जगन्निवास! आप प्रसन्न होइये।।

नेपाली

अघि नदेखेको त्यो रूप देखेर मलाई हर्ष भएको छ; तर मेरो मन भयले व्याकुल छ। हे देव! हे जगन्निवास! प्रसन्न हुनुहोस् र मलाई पहिलेकै रूप देखाइदिनुहोस्।

श्लोक 46 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव। तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते

अङ्ग्रेजी

I desire to see You as before, crowned, bearing a mace, with the discus in hand, in Your former form only, having four arms, O thousand-armed, Cosmic Being.

हिन्दी

मैं आपको उसी प्रकार मुकुटधारी, गदा और चक्र हाथ में लिए हुए देखना चाहता हूँ। हे विश्वमूर्ते! हे सहस्रबाहो! आप उस चतुर्भुजरूप के ही बन जाइए।।

नेपाली

हे सहस्रबाहो! हे विश्वमूर्ते! किरीट, गदा र हातमा चक्र लिएको चतुर्भुज तपाईंको त्यही पहिलेको रूप म देख्न चाहन्छु।

श्लोक 47 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

श्री भगवानुवाच मया प्रसन्नेन तवार्जुनेदं रूपं परं दर्शितमात्मयोगात्। तेजोमयं विश्वमनन्तमाद्यं यन्मे त्वदन्येन न दृष्टपूर्वम्

अङ्ग्रेजी

The Blessed Lord said, "O Arjuna, this Cosmic Form has graciously been shown to you by Me through My own Yogic power. It is full of splendour, primeval, and infinite; this Cosmic Form of Mine has never been seen before by anyone other than you."

हिन्दी

हे अर्जुन! तुम पर प्रसन्न होकर मैंने अपनी योगशक्ति (आत्मयोगात्) के प्रभाव से यह अपना परम तेजोमय, सबका आदि और अनन्त विश्वरूप तुझे दर्शाया है, जिसे तुम्हारे पूर्व किसी ने नहीं देखा है।।

नेपाली

श्रीभगवान्ले भने — हे अर्जुन! मैले प्रसन्न भएर आफ्नो योगबलले तिमीलाई आफ्नो यो परम तेजोमय, आदि, अनन्त, विश्व-रूप देखाएँ; तिमीबाहेक कसैले पहिले देखेको थिएन।

श्लोक 48 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानै र्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः। एवंरूपः शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर

अङ्ग्रेजी

Neither by the study of the Vedas, nor by gifts, nor by sacrifices, nor by severe austerities, can I be seen in this form in the world of men by any other than yourself, O great hero of the Kurus (Arjuna).

हिन्दी

हे कुरुप्रवीर! तुम्हारे अतिरिक्त इस मनुष्य लोक में किसी अन्य के द्वारा मैं इस रूप में, न वेदाध्ययन और न यज्ञ, न दान और न (धार्मिक) क्रियायों के द्वारा और न उग्र तपों के द्वारा ही देखा जा सकता हूँ।।

नेपाली

हे कुरुप्रवीर! वेद-अध्ययन, यज्ञ, दान, क्रिया वा कठोर तप कुनैले पनि मानव-लोकमा मेरो यो रूप तिमीबाहेक अरू कसैलाई देख्न सम्भव छैन।

श्लोक 49 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम्। व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य

अङ्ग्रेजी

Do not be afraid, nor be bewildered on seeing such a terrible form of Mine; with your fear dispelled and with a gladdened heart, now behold again this former form of Mine.

हिन्दी

इस प्रकार मेरे इस घोर रूप को देखकर तुम व्यथा और मूढ़भाव को मत प्राप्त हो। निर्भय और प्रसन्नचित्त होकर तुम पुन: मेरे उसी (पूर्व के) रूप को देखो।।

नेपाली

मेरो यो भयङ्कर रूप देखेर तिमीलाई व्यथा र मूढता नहोस्; भयरहित, प्रसन्न-चित्त भएर अब तिमी मेरो त्यो पहिलेकै रूप हेर।

श्लोक 50 सञ्जय उवाच · सञ्जय सुनाउँछन्
संस्कृत

सञ्जय उवाच इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः। आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा

अङ्ग्रेजी

Sanjaya said, Having thus spoken to Arjuna, Krishna again showed His own form. The great Soul, assuming His gentle form, then consoled Arjuna, who was terrified.

हिन्दी

संजय ने कहा -- भगवान् वासुदेव ने अर्जुन से इस प्रकार कहकर, पुन: अपने (पूर्व) रूप को दर्शाया, और फिर, सौम्यरूप महात्मा श्रीकृष्ण ने इस भयभीत अर्जुन को आश्वस्त किया।।

नेपाली

सञ्जयले भने — अर्जुनलाई यसो भनेर वासुदेवले आफ्नो स्वरूप पुनः देखाउनुभयो; अनि महात्माले सौम्य रूप धारण गरेर भयभीत अर्जुनलाई सान्त्वना दिनुभयो।

श्लोक 51 अर्जुन उवाच · अर्जुन भन्छन्
संस्कृत

अर्जुन उवाच दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तवसौम्यं जनार्दन। इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः

अङ्ग्रेजी

Arjuna said, "Having seen this Thy gentle human form, O Krishna, now I am composed and have been restored to my own nature."

हिन्दी

अर्जुन ने कहा -- हे जनार्दन! आपके इस सौम्य मनुष्य रूप को देखकर अब मैं शांतचित्त हुआ अपने स्वभाव को प्राप्त हो गया हूँ।।

नेपाली

अर्जुनले भने — हे जनार्दन! तपाईंको यो सौम्य मानुषी रूप देखेर अहिले म प्रकृतिमा फर्केर शान्त भएँ।

श्लोक 52 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

श्री भगवानुवाच सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम। देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाङ्क्षिणः

अङ्ग्रेजी

The Blessed Lord said, "It is very hard indeed to see this form of Mine which thou hast seen; even the gods are ever longing to behold it."

हिन्दी

श्रीभगवान् ने कहा -- मेरा यह रूप देखने को मिलना अति दुर्लभ है, जिसको कि तुमने देखा है। देवतागण भी सदा इस रूप के दर्शन के इच्छुक रहते हैं।।

नेपाली

श्रीभगवान्ले भने — मेरो यो रूप जुन तिमीले देख्यौ, त्यो हेर्न अति दुर्लभ छ; देवताहरू पनि सदा यस रूपका दर्शनको कामना गर्छन्।

श्लोक 53 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया। शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा

अङ्ग्रेजी

Neither by the Vedas, nor by austerity, nor by gift, nor by sacrifice can I be seen in this form as thou hast seen Me so easily.

हिन्दी

न वेदों से, न तप से, न दान से और न यज्ञ से ही मैं इस प्रकार देखा जा सकता हूँ, जैसा कि तुमने मुझे देखा है।।

नेपाली

तिमीले देखेजस्तो मलाई वेद, तप, दान वा यज्ञद्वारा सायदै हेर्न सकिन्छ।

श्लोक 54 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

भक्त्या त्वनन्यया शक्यमहमेवंविधोऽर्जुन। ज्ञातुं दृष्टुं च तत्त्वेन प्रवेष्टुं च परंतप

अङ्ग्रेजी

But by single-minded devotion, I can be known, seen, and entered into in reality, O Arjuna.

हिन्दी

परन्तु हे परन्तप अर्जुन! अनन्य भक्ति के द्वारा मैं तत्त्वत: 'जानने', 'देखने' और 'प्रवेश' करने के लिए (एकी भाव से प्राप्त होने के लिए) भी, शक्य हूँ!।।

नेपाली

हे अर्जुन! तर अनन्य भक्तिले मात्र म यस्तो रूपमा जान्न, देख्न र प्रवेश गर्न सकिन्छु।

श्लोक 55 श्रीभगवानुवाच · कृष्ण भन्नुहुन्छ
संस्कृत

मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः। निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव

अङ्ग्रेजी

He who does all actions for Me, who regards Me as the Supreme, who is devoted to Me, who is free from attachment, who bears no enmity towards any creature, he comes to Me, O Arjuna.

हिन्दी

हे पाण्डव! जो पुरुष मेरे लिए ही कर्म करने वाला है, और मुझे ही परम लक्ष्य मानता है, जो मेरा भक्त है तथा संगरहित है, जो भूतमात्र के प्रति निर्वैर है, वह मुझे प्राप्त होता है।।

नेपाली

हे पाण्डव! मेरै लागि कर्म गर्ने, मलाई परम लक्ष्य ठान्ने, मेरो भक्त, आसक्तिरहित र सबै प्राणीप्रति वैररहित पुरुष मलाई नै प्राप्त गर्छ।