Chapter 25

Rajadharmanushasana Parva — Vyasa describes the Time.

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arjuna kunti yudhishthira vyasa
Verse 1
Sanskrit

वैशम्पायन उवाच द्वैपायनवचः श्रुत्वा कुपिते च धनंजये। व्यासमामन्त्र्य कौन्तेयः प्रत्युवाच युधिष्ठिरः॥

English

Hearing the words of Dvaipayana Vyasa and seeing Dhananjaya angry, Yudhishthira the son of Kunti saluted Vyasa and said.

Hindi

द्वैपायन व्यास के वचन सुनकर और धनञ्जय को क्रुद्ध देखकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर ने व्यास को प्रणाम करके कहा।

Nepali

द्वैपायन व्यासका वचन सुनेर र धनञ्जयलाई क्रुद्ध देखेर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिरले व्यासलाई प्रणाम गरेर भने।

yudhishthira
Verse 2
Sanskrit

युधिष्ठिर उवाच न पार्थिवमिदं राज्यं न भोगाश्च पृथग्विधाः। प्रीणयन्ति मनो मेऽद्य शोको मां रुन्धयत्ययम्॥

English

Yudhishthira said This earthly sovereignty and the various objects of enjoyments cannot give me any joy. On the other hand, this painful grief is cutting me to the quick.

Hindi

युधिष्ठिर ने कहा — यह पार्थिव राज्य और नाना भोग की वस्तुएँ मुझे कोई आनन्द नहीं दे सकतीं। इसके विपरीत यह पीड़ादायक शोक मुझे भीतर तक काट रहा है।

Nepali

युधिष्ठिरले भने — यो पार्थिव राज्य र नाना भोगका वस्तुले मलाई कुनै आनन्द दिन सक्दैनन्। यसको विपरीत यो पीडादायक शोकले मलाई भित्रैसम्म काटिरहेको छ।

Verse 3
Sanskrit

श्रुत्वा वीरविहीनानामपुत्राणां च योषिताम्। परिदेवपमानानां शान्तिं नोपलभे मुने।॥

English

Hearing the lamentations of these women who have lost their heroic husbands and children, I cannot enjoy peace, O sage.

Hindi

हे मुने, अपने वीर पतियों और सन्तानों को खो चुकी इन स्त्रियों का विलाप सुनकर मैं शान्ति नहीं पा सकता।

Nepali

हे मुने, आफ्ना वीर पति र सन्तान गुमाइसकेका यी स्त्रीहरूको विलाप सुनेर म शान्ति पाउन सक्दिनँ।

yudhishthira vyasa
Verse 4
Sanskrit

वैशम्पायन उवाच इत्युक्तः प्रत्युवाचेदं व्यासो योगविदां वरः। युधिष्ठिरं महाप्राज्ञो धर्मज्ञो वेदपारगः॥

English

Vaishampayana said Thus addressed, the virtuous Vyasa, the best of all persons conversant with Yoga, endued with great wisdom and a master of the Vedas, said to Yudhishthira.

Hindi

वैशम्पायन ने कहा — इस प्रकार सम्बोधित किए जाने पर योग के समस्त ज्ञाताओं में श्रेष्ठ, महान् बुद्धि से सम्पन्न और वेदों के आचार्य धर्मात्मा व्यास ने युधिष्ठिर से कहा।

Nepali

वैशम्पायनले भने — यसरी सम्बोधन गरिएपछि योगका सम्पूर्ण ज्ञाताहरूमा श्रेष्ठ, महान् बुद्धिले सम्पन्न र वेदका आचार्य धर्मात्मा व्यासले युधिष्ठिरलाई भने।

vyasa
Verse 5
Sanskrit

व्यास उवाच न कर्मणा लभ्यते चिन्तया वा नाप्यस्ति दाता पुरुषस्य कश्चित्। पर्याययोगाद् विहितं विधात्रा कालेन सर्वं लभते मनुष्यः॥

English

Vyasa said, No one can acquire anything by his own deeds or by sacrifices and adoration. No man can give anything to another. Man gets everything through Time. The Great Ordainer has made the course of Time the instrument of acquisition.

Hindi

व्यास ने कहा — कोई भी अपने कर्मों से अथवा यज्ञों और उपासना से कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता। कोई मनुष्य दूसरे को कुछ नहीं दे सकता। मनुष्य सब कुछ काल से ही पाता है। परम विधाता ने काल की गति को ही प्राप्ति का साधन बनाया है।

Nepali

व्यासले भने — कसैले पनि आफ्ना कर्मले अथवा यज्ञ र उपासनाले केही पनि प्राप्त गर्न सक्दैन। कुनै मानिसले अर्कोलाई केही दिन सक्दैन। मानिसले सबथोक कालबाटै पाउँछ। परम विधाताले कालको गतिलाई नै प्राप्तिको साधन बनाएका छन्।

Verse 6
Sanskrit

न बुद्धिशास्त्राध्ययनेन शक्यं प्राप्तुं विशेषं मनुजैरकाले। मूर्योऽपि चाप्नोति कदाचिदर्थान् कालो हि कार्य प्रति निर्विशेषः॥

English

By mere intelligence of study of the scriptures, men, if Time be not propitious, cannot acquire any earthly object. Sometimes an ignorant fool may acquire wealth. Time is the the powerful instrument for the accomplishment of all acts.

Hindi

यदि काल अनुकूल न हो, तो केवल बुद्धि अथवा शास्त्रों के अध्ययन से मनुष्य कोई सांसारिक वस्तु प्राप्त नहीं कर सकता। कभी-कभी अज्ञानी मूर्ख भी धन पा जाता है। समस्त कर्मों की सिद्धि का सबसे प्रबल साधन काल ही है।

Nepali

यदि काल अनुकूल भएन भने केवल बुद्धि अथवा शास्त्रको अध्ययनले मानिसले कुनै सांसारिक वस्तु प्राप्त गर्न सक्दैन। कहिलेकाहीँ अज्ञानी मूर्खले पनि धन पाउँछ। सम्पूर्ण कर्मको सिद्धिको सबैभन्दा प्रबल साधन काल नै हो।

Verse 7
Sanskrit

नाभूतिकालेषु फलं ददन्ति शिल्पानि मन्त्राश्च तथौषधानि। तान्येव कालेन समाहितानि सिद्ध्यन्ति वर्धन्ति च भूतिकाले॥

English

During the hour of adversity, neither science, nor incantations, nor drugs, produce any fruits. In prosperity, however, those very things, applied, yield abundant fruits.

Hindi

विपत्ति के समय न विद्या, न मन्त्र, न औषधियाँ — कोई फल नहीं देतीं। किन्तु समृद्धि के समय वे ही वस्तुएँ प्रयुक्त होने पर प्रचुर फल देती हैं।

Nepali

विपत्तिको समयमा न विद्या, न मन्त्र, न औषधि — कुनैले फल दिँदैनन्। तर समृद्धिको समयमा तिनै वस्तुहरू प्रयोग हुँदा प्रशस्त फल दिन्छन्।

Verse 8
Sanskrit

कालेन शीघ्राः प्रवहन्ति वाता: कालेन वृष्टिर्जलदानुपति। कालेन पद्मोत्पलवज्जलं च कालेन पुष्यन्ति वनेषु वृक्षाः॥

English

By time the winds blow violently; by Time the clouds become surcharged with rain; by Time tanks become adorned with lotuses of various sorts; by Time trees in the forest are covered with flowers.

Hindi

काल से ही वायु प्रचण्ड वेग से बहती है; काल से ही बादल जल से भर जाते हैं; काल से ही सरोवर नाना प्रकार के कमलों से सुशोभित होते हैं; काल से ही वन के वृक्ष फूलों से ढक जाते हैं।

Nepali

कालबाटै वायु प्रचण्ड वेगले बहन्छ; कालबाटै बादल जलले भरिन्छन्; कालबाटै सरोवरहरू नाना प्रकारका कमलले सुशोभित हुन्छन्; कालबाटै वनका रूखहरू फूलले ढाकिन्छन्।

Verse 9
Sanskrit

कालेन कृष्णाश्च सिताश्च रात्र्यः कालेन चन्द्रः परिपूर्णबिम्बः। नाकालतः पुष्पफलं दुमाणां नाकालवेगाः सरितो वहन्ति॥

English

By Time nights become dark or lighted. By Time the Moon becomes full. If the proper Time does not come, trees do not bear flowers and fruits. If the proper Time does not come, the currents of rivers do not become powerful.

Hindi

काल से ही रातें अन्धकारमय अथवा प्रकाशमय होती हैं। काल से ही चन्द्रमा पूर्ण होता है। यदि उचित काल न आए, तो वृक्ष फूल और फल नहीं देते। यदि उचित काल न आए, तो नदियों की धाराएँ प्रबल नहीं होतीं।

Nepali

कालबाटै रातहरू अन्धकारमय अथवा प्रकाशमय हुन्छन्। कालबाटै चन्द्रमा पूर्ण हुन्छ। यदि उचित काल आएन भने रूखहरूले फूल र फल दिँदैनन्। यदि उचित काल आएन भने नदीहरूका धारा प्रबल हुँदैनन्।

Verse 10
Sanskrit

नाकालमत्ताः खगपन्नगाश्च मृगद्विपाः शैलमृगाच लोके। नाकालतः स्त्रीषु भवन्ति गर्भा नायान्त्यकाले शिशिरोष्णवर्षाः॥

English

Birds, snakes, deer, elephants and other animals never become excited when the proper Time does not come. If the proper Time does not come, women do not conceive. It is with Time that winter, summer, and the rainy seasons come.

Hindi

पक्षी, साँप, मृग, हाथी तथा अन्य पशु उचित काल आए बिना कभी उत्तेजित नहीं होते। यदि उचित काल न आए, तो स्त्रियाँ गर्भ धारण नहीं करतीं। काल से ही शीत, ग्रीष्म और वर्षा ऋतुएँ आती हैं।

Nepali

पक्षी, सर्प, मृग, हात्ती तथा अन्य पशुहरू उचित काल नआई कहिल्यै उत्तेजित हुँदैनन्। यदि उचित काल आएन भने स्त्रीहरूले गर्भ धारण गर्दैनन्। कालबाटै शीत, ग्रीष्म र वर्षा ऋतु आउँछन्।

Verse 11
Sanskrit

नाकालतो म्रियते जायते वा नाकालतो व्याहरते च बालः। नाकालतो यौवनमभ्युपैति नाकालतो रोहति बीजमुप्तम्॥

English

If the proper Time does not come, no one is born and no one dies. If the Time does not come, the infant does not gain power of speech. If the Time does not come one does not come by youth. It is with Time that the seed sown sprouts up.

Hindi

यदि उचित काल न आए, तो न कोई जन्म लेता है और न कोई मरता है। यदि काल न आए, तो शिशु बोलने की शक्ति नहीं पाता। यदि काल न आए, तो कोई युवावस्था को नहीं पाता। काल से ही बोया हुआ बीज अंकुरित होता है।

Nepali

यदि उचित काल आएन भने न कोही जन्मन्छ न कोही मर्दछ। यदि काल आएन भने शिशुले बोल्ने शक्ति पाउँदैन। यदि काल आएन भने कसैले युवावस्था पाउँदैन। कालबाटै छरेको बीउ उम्रन्छ।

Verse 12
Sanskrit

नाकालतो भानुरुपैति योगं नाकालतोऽङ्गिरिमभ्युपैति। नाकालतो वर्धते ही चन्द्रः समुद्रोऽपि महोर्मिमाली।॥

English

If the Time does not come, the Sun does not appear in the horizon, nor, when the Time for it does not come, does he set. If the Time for it does not come, the Moon does not increase nor wane, nor the ocean with its waves rise and ebb.

Hindi

यदि काल न आए, तो सूर्य क्षितिज पर प्रकट नहीं होता; और जब तक उसका काल न आए, वह अस्त भी नहीं होता। यदि उसका काल न आए, तो न चन्द्रमा बढ़ता है और न घटता; और न लहरों वाला समुद्र उठता और उतरता है।

Nepali

यदि काल आएन भने सूर्य क्षितिजमा प्रकट हुँदैन; र जबसम्म त्यसको काल आउँदैन, ऊ अस्ताउँदैन पनि। यदि त्यसको काल आएन भने न चन्द्रमा बढ्दछ न घट्दछ; न छाल भएको समुद्र उठ्दछ र ओर्लन्छ।

yudhishthira
Verse 13
Sanskrit

अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्। गीतं राज्ञा सेनजिता दुःखार्तेन युधिष्ठिर॥

English

In this connection is related the old story, O Yudhishthira, by king Senajit in sorrow.

Hindi

हे युधिष्ठिर, इस विषय में राजा सेनजित् ने शोक में जो प्राचीन कथा कही थी वह सुनाई जाती है।

Nepali

हे युधिष्ठिर, यस विषयमा राजा सेनजित्ले शोकमा जुन प्राचीन कथा भनेका थिए त्यो सुनाइन्छ।

Verse 14
Sanskrit

सर्वानेवैष पर्यायो मान् स्पृशति दुःसहः। कालेन परिपक्वा हि म्रियन्ते सर्वपार्थिवाः॥

English

The powerful course of Time affects all mortals. All earthly objects, ripened by Time, meet with destruction.

Hindi

काल की प्रबल गति समस्त मर्त्य प्राणियों को प्रभावित करती है। काल से पके हुए समस्त सांसारिक पदार्थ विनाश को प्राप्त होते हैं।

Nepali

कालको प्रबल गतिले सम्पूर्ण मर्त्य प्राणीलाई प्रभावित पार्दछ। कालले पाकेका सम्पूर्ण सांसारिक पदार्थ विनाशमा पुग्दछन्।

Verse 15
Sanskrit

घ्नन्ति चान्यान् नरा राजस्तानप्यन्ये तथा नराः। संज्ञैषा लौकिकी राजन् न हिनस्ति न हन्यते॥

English

Some, O king, kill some men. The killers, again, are slain by others. This is what the world says. In reality, however, no one kills and no one is killed.

Hindi

हे राजन्, कुछ लोग कुछ लोगों का वध करते हैं। और वे वध करने वाले दूसरों द्वारा मारे जाते हैं। संसार ऐसा ही कहता है। किन्तु वस्तुतः न कोई मारता है और न कोई मारा जाता है।

Nepali

हे राजन्, केही मानिसहरूले केही मानिसहरूको वध गर्दछन्। र ती वध गर्नेहरू अरूद्वारा मारिन्छन्। संसारले यस्तै भन्दछ। तर वास्तवमा न कसैले मार्दछ न कोही मारिन्छ।

Verse 16
Sanskrit

हन्तीति मन्यते कश्चिन्न हन्तीत्यपि चापरः। स्वभावतस्तु नियतौ भूतानां प्रभवाप्ययौ॥

English

Some body thinks men kill (their fellow men). Another thinks men do not kill. The truth is that the birth and death of all creatures have been ordained to happen by their very nature.

Hindi

कोई सोचता है कि मनुष्य (अपने साथी मनुष्यों का) वध करते हैं। दूसरा सोचता है कि मनुष्य वध नहीं करते। सत्य यह है कि समस्त प्राणियों का जन्म और मृत्यु उनके अपने ही स्वभाव से होने के लिए विहित है।

Nepali

कोही सोच्छ कि मानिसहरूले (आफ्ना सहचर मानिसहरूको) वध गर्दछन्। अर्को सोच्छ कि मानिसहरूले वध गर्दैनन्। सत्य यो हो कि सम्पूर्ण प्राणीहरूको जन्म र मृत्यु तिनकै स्वभावले हुनका लागि विहित छ।

Verse 17
Sanskrit

नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते। अहो दुःखमिति ध्यायन् दुःखस्यापचितिं चरेत्॥

English

At the loss of one's riches or the death of one's wife or son or father, one cries out saying-Alas what grief!-and the continued thought of that sorrow always increases it.

Hindi

अपना धन खो जाने पर अथवा अपनी पत्नी, पुत्र या पिता की मृत्यु पर मनुष्य 'हाय, कितना शोक!' कहकर चीत्कार करता है; और उस शोक का निरन्तर चिन्तन उसे सदा बढ़ाता ही है।

Nepali

आफ्नो धन गुमेपछि अथवा आफ्नी पत्नी, पुत्र वा पिताको मृत्युमा मानिसले 'हाय, कति शोक!' भन्दै चित्कार गर्दछ; र त्यस शोकको निरन्तर चिन्तनले त्यसलाई सधैँ बढाउँछ मात्र।

Verse 18
Sanskrit

स किं शोचसि मूढः सञ्शोच्यान् किमनुशोचसि। पश्य दुःखेषु दुःखानि भयेषु च भयान्यपि॥

English

Why do you, like a foolish man, grieve? Why do you grieve for them who are subject to grief? Mark, grief is enhanced by indulgence as fear is by fearing.

Hindi

तुम मूर्ख पुरुष के समान शोक क्यों करते हो? जो स्वयं शोक के अधीन हैं उनके लिए तुम शोक क्यों करते हो? देखो, जैसे भय भयभीत होने से बढ़ता है, वैसे ही शोक उसमें डूबे रहने से बढ़ता है।

Nepali

तिमी मूर्ख पुरुषजस्तै शोक किन गर्दछौ? जो आफैँ शोकको अधीनमा छन् तिनका लागि तिमी शोक किन गर्दछौ? हेर, जसरी भय भयभीत हुनाले बढ्दछ, त्यसरी नै शोक त्यसमा डुबिरहनाले बढ्दछ।

Verse 19
Sanskrit

आत्मापि चायं न मम सर्वापि पृथिवी मम। यथा मम तथान्येषामिति पश्यन् न मुह्यति॥

English

This body even is not mine. Nothing in this Earth is mine. The things of this Earth belong as much to others as to me. Seeing this, the wise do not allow themselves to be beguiled.

Hindi

यह शरीर तक मेरा नहीं है। इस पृथ्वी पर कुछ भी मेरा नहीं है। इस पृथ्वी की वस्तुएँ जितनी मेरी हैं उतनी ही दूसरों की भी हैं। यह देखकर विद्वान् अपने को छला जाने नहीं देते।

Nepali

यो शरीरसम्म मेरो होइन। यस पृथ्वीमा केही पनि मेरो होइन। यस पृथ्वीका वस्तु जति मेरा छन् त्यति नै अरूका पनि छन्। यो देखेर विद्वान्हरूले आफूलाई छल्न दिँदैनन्।

Verse 20
Sanskrit

शोकस्थानसहस्राणि हर्षस्थानशतानि च। दिवसे दिवसे मूढमाविशन्ति न पण्डितम्॥

English

There are thousands of causes for sorrow and hundreds of causes for joy. These affect daily the ignorant only, but not the wise.

Hindi

शोक के हजारों कारण हैं और हर्ष के सैकड़ों। ये प्रतिदिन केवल अज्ञानियों को ही प्रभावित करते हैं, विद्वानों को नहीं।

Nepali

शोकका हजारौँ कारण छन् र हर्षका सयौँ। यीले दिनहुँ केवल अज्ञानीहरूलाई मात्र प्रभावित पार्दछन्, विद्वान्हरूलाई होइन।

Verse 21
Sanskrit

एवमेतानि कालेन प्रियद्वेष्याणि भागशः। जीवेषु परिवर्तन्ते दुःखानि च सुखानि च॥

English

These in course of Time. become objects of love or hatred, and appearing as happiness or misery revolve for affecting living creatures.

Hindi

काल के प्रवाह में ये राग अथवा द्वेष के विषय बन जाते हैं और सुख या दुःख के रूप में प्रकट होकर प्राणियों को प्रभावित करने के लिए घूमते रहते हैं।

Nepali

कालको प्रवाहमा यी राग अथवा द्वेषका विषय बन्दछन् र सुख वा दुःखका रूपमा प्रकट भई प्राणीहरूलाई प्रभावित पार्न घुमिरहन्छन्।

Verse 22
Sanskrit

दुःखमेवास्ति न सुखं तस्मात् तदुपलभ्यते। तृष्णार्तिप्रभवं दुःखं दुःखार्तिप्रभवं सुखम्॥

English

There is only sorrow in this world and not happiness. Therefore sorrow only is felt. Desire begets sorrow and sorrow happiness.

Hindi

इस संसार में केवल दुःख है, सुख नहीं। इसीलिए दुःख ही अनुभव होता है। कामना दुःख को जन्म देती है और दुःख सुख को।

Nepali

यस संसारमा केवल दुःख छ, सुख छैन। त्यसैले दुःख नै अनुभव हुन्छ। कामनाले दुःखलाई जन्म दिन्छ र दुःखले सुखलाई।

Verse 23
Sanskrit

सुखस्यानन्तरं दुःखं दुःखस्यानन्तरं सुखम्। न नित्यं लभते दुःखं न नित्यं लभते सुखम्॥

English

Sorrow comes after happiness. and happiness after sorrow. One does not always suffer sorrow or always enjoy happiness.

Hindi

सुख के बाद दुःख आता है और दुःख के बाद सुख। कोई सदा दुःख ही नहीं भोगता और न सदा सुख ही भोगता है।

Nepali

सुखपछि दुःख आउँछ र दुःखपछि सुख। कसैले सधैँ दुःख मात्र भोग्दैन न सधैँ सुख मात्र भोग्दछ।

Verse 24
Sanskrit

सुखमेवहि दुःखान्तं कदाचिद् दुःखतः सुखम्। तस्मादेतद् द्वयं जह्याद् य इच्छेच्छाश्वतं सुखम्॥

English

Happiness always ends in sorrow and sometimes originates from sorrow itself. He, therefore, who desires perpetual happiness must give up both.

Hindi

सुख का अन्त सदा दुःख में होता है और कभी-कभी वह दुःख से ही उत्पन्न होता है। इसलिए जो चिरस्थायी सुख चाहता है उसे दोनों ही त्याग देने चाहिए।

Nepali

सुखको अन्त्य सधैँ दुःखमा हुन्छ र कहिलेकाहीँ त्यो दुःखबाटै उत्पन्न हुन्छ। त्यसैले जसले चिरस्थायी सुख चाहन्छ उसले दुवै नै त्यागिदिनुपर्दछ।

Verse 25
Sanskrit

सुखान्तप्रभवं दुःखं दुःखान्तप्रभवं सुखम्। यन्निमित्तो भवेच्छोकस्तापो वा भृशदारुणः॥ आयासो वापि यन्मूलस्तदेकाङ्गमपि त्यजेत्।

English

When sorrow must arise upon termination of happiness, and happiness upon the termination of sorrow, and should, therefore, shake off, like a (snake-bit) limb, that which begets sorrow or that heart-burning which is reared by sorrow or that which is the root of his anxiety.

Hindi

जब सुख के समाप्त होने पर दुःख उठना ही है और दुःख के समाप्त होने पर सुख, तब मनुष्य को चाहिए कि (साँप के डँसे हुए) अंग के समान उसे झाड़ फेंके जो दुःख को जन्म देता है, अथवा उस हृदय-दाह को जो दुःख से पलता है, अथवा उसे जो उसकी चिन्ता की जड़ है।

Nepali

जब सुख समाप्त हुँदा दुःख उठ्नै छ र दुःख समाप्त हुँदा सुख, तब मानिसले (सर्पले टोकेको) अङ्गजस्तै त्यसलाई झट्कारेर फाल्नुपर्दछ जसले दुःखलाई जन्म दिन्छ, अथवा त्यस हृदय-दाहलाई जो दुःखले हुर्किन्छ, अथवा त्यसलाई जो उसको चिन्ताको जरा हो।

Verse 26
Sanskrit

सुखं वा यदि वा दुःखं प्रियं वा यदि वाप्रियम्। प्राप्तं प्राप्तमुपासीत हृदयेनापराजितः॥

English

Happiness or sorrow, whatever comes should be borne with an unaffected heart.

Hindi

सुख हो या दुःख — जो कुछ आए उसे अविचल हृदय से सहना चाहिए।

Nepali

सुख होस् वा दुःख — जे-जति आउँछ त्यसलाई अविचल हृदयले सहनुपर्दछ।

Verse 27
Sanskrit

ईषदप्यङ्ग दाराणां पुत्राणां वा चराप्रियम्। ततो ज्ञास्यसि कः कस्य केन वा कथमेव च।॥

English

O amiable king, if you do not in the least, do what is agreeable to your wives and children, you shall then know who is whose, and why so, and for what.

Hindi

हे प्रिय राजन्, यदि तुम अपनी स्त्रियों और सन्तानों को प्रिय लगने वाला कुछ भी न करो, तब तुम जान लोगे कि कौन किसका है, और क्यों है, और किसलिए है।

Nepali

हे प्रिय राजन्, यदि तिमीले आफ्ना स्त्री र सन्तानलाई प्रिय लाग्ने केही पनि नगर, तब तिमीले जान्नेछौ कि को कसको हो, र किन हो, र केका लागि हो।

Verse 28
Sanskrit

ये च मूढतमा लोके ये च बुद्धेः परं गताः। त एव सुखमेधन्ते मध्यमः क्लिश्यते जनः॥

English

Only those who stolid fools and those who are masters of their souls enjoy happiness here. They, however, who occupy an intermediate position suffering misery.

Hindi

यहाँ केवल वे ही सुख भोगते हैं जो जड़ मूर्ख हैं और वे जो अपनी आत्मा के स्वामी हैं। किन्तु जो इनके बीच की स्थिति में हैं वे दुःख भोगते हैं।

Nepali

यहाँ केवल तिनैले सुख भोग्दछन् जो जड मूर्ख छन् र तिनीहरू जो आफ्नो आत्माका स्वामी छन्। तर जो यिनको बीचको स्थितिमा छन् तिनीहरूले दुःख भोग्दछन्।

yudhishthira
Verse 29
Sanskrit

इत्यब्रवीन्महाप्राज्ञो युधिष्ठिर स सेनजित्। परावरज्ञो लोकस्य धर्मवित् सुखदुःखवित्॥

English

This, O Yudhishthira, is what the highly wise the Senajit who was conversant with what is good or bad in this world, with duties, and with happiness and misery said.

Hindi

हे युधिष्ठिर, संसार में क्या भला और क्या बुरा है, धर्म क्या है, तथा सुख और दुःख क्या हैं — इन सबके ज्ञाता परम बुद्धिमान् सेनजित् ने यही कहा था।

Nepali

हे युधिष्ठिर, संसारमा के असल र के खराब छ, धर्म के हो, तथा सुख र दुःख के हुन् — यी सबैका ज्ञाता परम बुद्धिमान् सेनजित्ले यही भनेका थिए।

Verse 30
Sanskrit

येन दुःखेन यो दुःखी न स जातु सुखी भवेत्। दुःखानां हि क्षयो नास्ति जायते ह्यपरात् परम्॥

English

He who is grieved at other people's griefs can never enjoy happiness. There is no end of grief, and grief originates from happiness itself.

Hindi

जो दूसरों के दुःखों से दुःखी होता है वह कभी सुख नहीं भोग सकता। शोक का कोई अन्त नहीं है, और शोक सुख से ही उत्पन्न होता है।

Nepali

जो अरूका दुःखले दुःखी हुन्छ उसले कहिल्यै सुख भोग्न सक्दैन। शोकको कुनै अन्त्य छैन, र शोक सुखबाटै उत्पन्न हुन्छ।

Verse 31
Sanskrit

सुखं च दुःखं च भवाभवौ च लाभालाभौ मरणं जीवितं च। पर्यायतः सर्वमवाप्नुवन्ति तस्माद्धीरो नैव हृष्येन शोचेत्॥

English

Happiness and misery, prosperity and adversity, gain and loss, death and life, in their turn, visit all creatures. There the wise man, endued with equanimity soul would neither be puffed up with joy nor be depressed with sorrow.

Hindi

सुख और दुःख, समृद्धि और विपत्ति, लाभ और हानि, मृत्यु और जीवन — ये बारी-बारी से समस्त प्राणियों के पास आते हैं। इसलिए समचित्त विद्वान् पुरुष न हर्ष से फूलता है और न शोक से मुरझाता है।

Nepali

सुख र दुःख, समृद्धि र विपत्ति, लाभ र हानि, मृत्यु र जीवन — यी पालैपालो सम्पूर्ण प्राणीकहाँ आउँछन्। त्यसैले समचित्त विद्वान् पुरुष न हर्षले फुल्दछ न शोकले ओइलिन्छ।

Verse 32
Sanskrit

दीक्षां राज्ञः संयुगे युद्धमाई र्योगं राज्ये दण्डनीत्यां च सम्यक्। वित्तत्यागो दक्षिणानां च यज्ञे सम्यग् दानं पावनानीति विद्यात्॥

English

Battle has been described as the Sacrifice for a king; observance of chastisement is his Yoga; and the gift of riches in sacrifices in the form of presents his Renunciation. All these should be regarded as acts which purify him.

Hindi

युद्ध को राजा का यज्ञ कहा गया है; दण्ड का पालन उसका योग है; और यज्ञों में दक्षिणा के रूप में धन का दान उसका त्याग है। इन सबको उसे पवित्र करने वाले कर्म मानना चाहिए।

Nepali

युद्धलाई राजाको यज्ञ भनिएको छ; दण्डको पालन उसको योग हो; र यज्ञमा दक्षिणाका रूपमा धनको दान उसको त्याग हो। यी सबैलाई उसलाई पवित्र पार्ने कर्म मान्नुपर्दछ।

Verse 33
Sanskrit

रक्षन् राज्यं बुद्धिपूर्वं नयेन संत्यक्तात्मा यज्ञशीलो महात्मा। प्यूर्ध्वं देहान्मोदते देवलोके॥

English

By governing the kingdom with intelligence and policy, casting off wide, celebrating sacrifices, and looking at everything and all the persons with kindness and impartiality, a great king, after death, sports in the region of the celestials.

Hindi

बुद्धि और नीति से राज्य का शासन करके, अभिमान त्यागकर, यज्ञ करके तथा प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक व्यक्ति को दया और निष्पक्षता से देखकर महान् राजा मृत्यु के पश्चात् देवलोक में क्रीड़ा करता है।

Nepali

बुद्धि र नीतिले राज्यको शासन गरेर, अभिमान त्यागेर, यज्ञ गरेर तथा प्रत्येक वस्तु र प्रत्येक व्यक्तिलाई दया र निष्पक्षताले हेरेर महान् राजा मृत्युपछि देवलोकमा क्रीडा गर्दछ।

Verse 34
Sanskrit

जित्वा संग्रामान्पालयित्वा च राष्ट्र सोमं पीत्वा वर्धयित्वा प्रजाश्च। युक्त्या दण्डं धारयित्वा प्रजानांयुद्धे क्षीणो मोदते देवलोके॥

English

By gaining battles, protecting his kingdom, drinking the Soma juice, making his subjects prosper, holding judiciously the rod of chastisement, and renouncing his body at last in fight, a king enjoy happiness in heaven.

Hindi

युद्ध जीतकर, अपने राज्य की रक्षा करके, सोमरस पीकर, अपनी प्रजा को समृद्ध बनाकर, विवेकपूर्वक दण्ड धारण करके और अन्त में युद्ध में अपना शरीर त्यागकर राजा स्वर्ग में सुख भोगता है।

Nepali

युद्ध जितेर, आफ्नो राज्यको रक्षा गरेर, सोमरस पिएर, आफ्नो प्रजालाई समृद्ध बनाएर, विवेकपूर्वक दण्ड धारण गरेर र अन्त्यमा युद्धमा आफ्नो शरीर त्यागेर राजाले स्वर्गमा सुख भोग्दछ।

Verse 35
Sanskrit

सम्यग् वेदान् प्राप्य शास्त्राण्यधीत्य सम्यग् राज्यं पालयित्वा च राजा। चातुर्वर्ण्य स्थापयित्वा स्वधर्म पूतात्मा वै मोदते देवलोके॥

English

Having studied all the Vedas and the other scriptures duly, having protected the kingdom duly, and having made all the four orders follow their respective duties, a king become purified and finally sports in heaven.

Hindi

समस्त वेदों और अन्य शास्त्रों का विधिपूर्वक अध्ययन करके, राज्य की विधिपूर्वक रक्षा करके और चारों वर्णों से उनके अपने-अपने धर्म का पालन करवाकर राजा पवित्र हो जाता है और अन्ततः स्वर्ग में विहार करता है।

Nepali

सम्पूर्ण वेद र अन्य शास्त्रको विधिपूर्वक अध्ययन गरेर, राज्यको विधिपूर्वक रक्षा गरेर र चारै वर्णबाट तिनका आआफ्नो धर्मको पालन गराएर राजा पवित्र हुन्छ र अन्ततः स्वर्गमा विहार गर्दछ।

Verse 36
Sanskrit

यस्य वृत्तं नमस्यन्ति स्वर्गस्थस्यापि मानवाः। पौरजानपदामात्याः स राजा राजसत्तमः॥

English

He is the best of kings whose conduct, even after his death, is praised by the denizens of the city and the country and by his counsellors and friends.

Hindi

वही राजाओं में श्रेष्ठ है जिसके आचरण की मृत्यु के पश्चात् भी नगर और जनपद के निवासी तथा उसके मन्त्री और मित्र प्रशंसा करते हैं।

Nepali

त्यही राजाहरूमा श्रेष्ठ हो जसको आचरणको मृत्युपछि पनि नगर र जनपदका बासिन्दा तथा उसका मन्त्री र मित्रहरूले प्रशंसा गर्दछन्।