Chapter 7

Jnana Vijnana Yoga

The seventh chapter of the Bhagavad Gita is "Gyaan Vigyana Yoga ". In this chapter, Krishna reveals that he is the Supreme Truth, the principal cause and the sustaining force of everything. He reveals his illusionary energy in this material world called Maya, which is very difficult to overcome but those who surrender their minds unto Him attain Him easily. He also describes the four types of people who surrender to Him in devotion and the four kinds that don't. Krishna confirms that He is the Ultimate Reality and those who realize this Truth reach the pinnacle of spiritual realization and unite with the Lord.

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Verse 1 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

श्री भगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः। असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु

English

The Blessed Lord said, "O Arjuna, hear how you shall, without doubt, know Me fully, with your mind intent on Me, practicing Yoga and taking refuge in Me."

Hindi

हे पार्थ ! मुझमें असक्त हुए मन वाले तथा मदाश्रित होकर योग का अभ्यास करते हुए जिस प्रकार तुम मुझे समग्ररूप से, बिना किसी संशय के, जानोगे वह सुनो।।

Nepali

श्रीभगवान्ले भने — हे पार्थ! ममा आसक्तचित्त भएर, मेरै आश्रयमा रहेर योगाभ्यास गर्दा तिमी कसरी निःसन्देह पूर्ण रूपमा मलाई जान्न सक्छौ, सुन।

Verse 2 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः। यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते

English

I will declare to you in full this knowledge combined with realization, after knowing which nothing else remains to be known here.

Hindi

मैं तुम्हारे लिए विज्ञान सहित इस ज्ञान को अशेष रूप से कहूँगा जिसको जानकर यहाँ (जगत् में) फिर और कुछ जानने योग्य (ज्ञातव्य) शेष नहीं रह जाता है।।

Nepali

अब म तिमीलाई विज्ञानसहित यो ज्ञान पूर्ण रूपले बताउँछु; यो जानेपछि यस संसारमा अरू केही जान्नुपर्ने रहँदैन।

Verse 3 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्िचद्यतति सिद्धये। यततामपि सिद्धानां कश्िचन्मां वेत्ति तत्त्वतः

English

Among thousands of men, one may perchance strive for perfection; even among those successful strivers, only one may perchance know Me in essence.

Hindi

सहस्रों मनुष्यों में कोई ही मनुष्य पूर्णत्व की सिद्धि के लिए प्रयत्न करता है और उन प्रयत्नशील साधकों में भी कोई ही पुरुष मुझे तत्त्व से जानता है।।

Nepali

हजारौँ मानिसमध्ये कोही एकले सिद्धिको लागि प्रयत्न गर्छ; ती प्रयत्नशील सिद्धमध्ये पनि बिरलैले मलाई तत्त्वतः जान्छ।

Verse 4 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च। अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा

English

Earth, water, fire, air, ether, mind, intellect, and egoism—thus is My Nature divided eightfold.

Hindi

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश तथा मन, बुद्धि और अहंकार - यह आठ प्रकार से विभक्त हुई मेरी प्रकृति है।।

Nepali

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि र अहङ्कार — यसरी मेरो प्रकृति आठ भागमा विभाजित छ।

Verse 5 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम्। जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत्

English

O mighty-armed Arjuna, this is the inferior Prakriti; know it as distinct from My higher Prakriti, the very life-element, by which this world is upheld.

Hindi

हे महाबाहो ! यह अपरा प्रकृति है। इससे भिन्न मेरी जीवरूपी पराप्रकृति को जानो, जिससे यह जगत् धारण किया जाता है।।

Nepali

हे महाबाहु! यो मेरो अपरा प्रकृति हो; यसभन्दा भिन्न मेरो परा प्रकृति, जीवस्वरूप, जान — जसले यो संसारलाई धारण गरेको छ।

Verse 6 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय। अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा

English

Know that these two are the womb of all beings; thus, I am the source and dissolution of the whole universe.

Hindi

यह जानो कि समम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से उत्पत्ति वाले हैं। (अत:) मैं सम्पूर्ण जगत् का उत्पत्ति तथा प्रलय स्थान हूँ।।

Nepali

यी दुई प्रकृति नै सम्पूर्ण प्राणीका योनि हुन् भनी जान; म नै सम्पूर्ण जगत्को उत्पत्ति र प्रलयको कारण हुँ।

Verse 7 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय। मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव

English

There is nothing higher than Me, O Arjuna. All this is strung on Me, like clusters of gems on a string.

Hindi

हे धनंजय ! मुझसे श्रेष्ठ (परे) अन्य किचिन्मात्र वस्तु नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत् सूत्र में मणियों के सदृश मुझमें पिरोया हुआ है।।

Nepali

हे धनञ्जय! मभन्दा श्रेष्ठ अरू केही छैन; डोरीमा मणिको माला उनिएझैँ यो सबै ममा उनिएको छ।

Verse 8 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः। प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु

English

I am the flavor in water, O Arjuna; I am the light in the moon and the sun; I am the syllable Om in all the Vedas, sound in the ether and virility in men.

Hindi

हे कौन्तेय ! जल में मैं रस हूँ, चन्द्रमा और सूर्य में प्रकाश हूँ, सब वेदों में प्रणव (ँ़कार) हूँ तथा आकाश में शब्द और पुरुषों में पुरुषत्व हूँ।।

Nepali

हे कौन्तेय! म पानीको स्वाद हुँ, चन्द्र र सूर्यको प्रकाश हुँ; सम्पूर्ण वेदहरूको ओङ्कार, आकाशको शब्द र पुरुषको पौरुष म नै हुँ।

Verse 9 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ। जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु

English

I am the sweet fragrance in the earth and the brilliance in the fire, the life in all beings, and I am the austerity of ascetics.

Hindi

पृथ्वी में पवित्र गन्ध हूँ और अग्नि में तेज हूँ; सम्पूर्ण भूतों में जीवन हूँ और तपस्वियों में मैं तप हूँ।।

Nepali

म पृथ्वीको पवित्र सुगन्ध र अग्निको तेज हुँ, सबै प्राणीको जीवन हुँ र तपस्वीहरूको तप पनि म नै हुँ।

Verse 10 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्। बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्

English

Know Me, O Arjuna, as the eternal seed of all beings; I am the intelligence of the intelligent, and the splendour of the splendid objects.

Hindi

हे पार्थ ! सम्पूर्ण भूतों का सनातन बीज (कारण) मुझे ही जानो; मैं बुद्धिमानों की बुद्धि और तेजस्वियों का तेज हूँ।।

Nepali

हे पार्थ! मलाई सम्पूर्ण प्राणीको सनातन बीज जान्नुहोस्; बुद्धिमान्हरूको बुद्धि र तेजस्वीहरूको तेज म नै हुँ।

Verse 11 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम्। धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ

English

Of the strong, I am the strength devoid of desire and attachment, and in all beings, I am the desire in accordance with Dharma, O Arjuna.

Hindi

हे भरत श्रेष्ठ ! मैं बलवानों का कामना तथा आसक्ति से रहित बल हूँ और सब भूतों में धर्म के अविरुद्ध अर्थात् अनुकूल काम हूँ।।

Nepali

हे भरतर्षभ! बलवान्हरूको काम-राग-रहित बल म नै हुँ; प्राणीहरूमा धर्मविरुद्ध नभएको काम म नै हुँ।

Verse 12 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये। मत्त एवेति तान्विद्धि नत्वहं तेषु ते मयि

English

Whatever beings (and objects) that are pure, active, and inert, know that they proceed from Me. They are in Me, yet I am not in them.

Hindi

जो भी सात्त्विक (शुद्ध), राजसिक (क्रियाशील) और तामसिक (जड़) भाव हैं, उन सबको तुम मेरे से उत्पन्न हुए जानो; तथापि मैं उनमें नहीं हूँ, वे मुझमें हैं।।

Nepali

सात्त्विक, राजस र तामस — जे जे भाव छन्, ती सबै मबाटै उत्पन्न भएका जान; तर ती ममा छन्, म ती मा छैनँ।

Verse 13 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः सर्वमिदं जगत्। मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम्

English

Deluded by these Natures, composed of the three qualities of Nature, all this world does not know Me as distinct from them and immutable.

Hindi

त्रिगुणों से उत्पन्न इन भावों (विकारों) से सम्पूर्ण जगत् (लोग) मोहित हुआ इन (गुणों) से परे अव्यय स्वरूप मुझे नहीं जानता है।।

Nepali

त्रिगुणात्मक यी भावले मोहित भएर यो सम्पूर्ण जगत्ले यिनभन्दा परका, अव्यय मलाई चिन्दैन।

Verse 14 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया। मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते

English

Verily, this divine illusion of Mine, composed of the three qualities, is difficult to cross over; those who take refuge in Me alone, can cross over this illusion.

Hindi

यह दैवी त्रिगुणमयी मेरी माया बड़ी दुस्तर है। परन्तु जो मेरी शरण में आते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।।

Nepali

मेरो यो त्रिगुणमयी दैवी माया दुस्तर छ; जो मलाई नै शरण लिन्छन्, तिनले मात्र यो माया तर्न सक्छन्।

Verse 15 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः। माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः

English

The evil-doers and the deluded, who are the lowest of men, do not seek Me; those whose knowledge is destroyed by illusion follow the ways of demons.

Hindi

दुष्कृत्य करने वाले, मूढ, नराधम पुरुष मुझे नहीं भजते हैं; माया के द्वारा जिनका ज्ञान हर लिया गया है, वे आसुरी भाव को धारण किये रहते हैं।।

Nepali

मायाद्वारा अपहृत ज्ञानवाला, असुरी भाव अपनाएका मायावी, मूढ नराधमहरूले मेरो भजन गर्दैनन्।

Verse 16 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन। आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ

English

Four kinds of virtuous men worship Me, O Arjuna, and they are the distressed, the seekers of knowledge, the seekers of wealth, and the wise, O Lord of the Bharatas.

Hindi

हे भरत श्रेष्ठ अर्जुन ! उत्तम कर्म करने वाले (सुकृतिन:) आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी ऐसे चार प्रकार के लोग मुझे भजते हैं।।

Nepali

हे भरतर्षभ! आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी र ज्ञानी — यी चार प्रकारका सुकृति मानिसले मलाई भज्छन्।

Verse 17 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एकभक्ितर्विशिष्यते। प्रियो हि ज्ञानिनोऽत्यर्थमहं स च मम प्रियः

English

Of them, the wise who are ever steadfast and devoted to the One, excel; for I am exceedingly dear to the wise, and they are dear to Me.

Hindi

उनमें भी मुझ से नित्ययुक्त, अनन्य भक्ति वाला ज्ञानी श्रेष्ठ है, क्योंकि ज्ञानी को मैं अत्यन्त प्रिय हूँ और वह मुझे अत्यन्त प्रिय है।।

Nepali

तिनमध्ये नित्य योगयुक्त, एकनिष्ठ-भक्ति राख्ने ज्ञानी श्रेष्ठ छ; किनकि म ज्ञानीलाई अत्यन्त प्रिय छु र ऊ मलाई प्रिय छ।

Verse 18 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

उदाराः सर्व एवैते ज्ञानी त्वात्मैव मे मतम्। आस्थितः स हि युक्तात्मा मामेवानुत्तमां गतिम्

English

Indeed, all these are noble; however, I consider the wise man as My very Self; for, he is steadfast in mind and established in Me alone as the supreme goal.

Hindi

(यद्यपि) ये सब उत्कृष्ट हैं, परन्तु ज्ञानी तो मेरा स्वरूप ही है ऐसा मेरा मत है, क्योंकि वह स्थिर बुद्धि ज्ञानी अति उत्तम गतिस्वरूप मुझमें अच्छी प्रकार स्थित है।।

Nepali

यी सबै नै उदार हुन्; तर ज्ञानी त मेरो आत्मा नै हो भन्ने म ठान्छु; किनकि स्थिरचित्त त्यो मलाई नै परमगति ठानेर ममा स्थित रहन्छ।

Verse 19 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते। वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः

English

At the end of many births, the wise man comes to Me, realizing that all this is Vaasudeva (the innermost Self); such a great soul (Mahatma) is very hard to find.

Hindi

बहुत जन्मों के अन्त में (किसी एक जन्म विशेष में) ज्ञान को प्राप्त होकर कि 'यह सब वासुदेव है' ज्ञानी भक्त मुझे प्राप्त होता है; ऐसा महात्मा अति दुर्लभ है।।

Nepali

धेरै जन्मपछि ज्ञानी मलाई प्राप्त गर्छ — 'यो सबै वासुदेव नै हो' भनी जान्दछ; त्यस्तो महात्मा अत्यन्त दुर्लभ छ।

Verse 20 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः। तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया

English

Those whose wisdom has been taken away by this or that desire, go to other gods, following this or that rite, led by their own nature.

Hindi

भोगविशेष की कामना से जिनका ज्ञान हर लिया गया है, ऐसे पुरुष अपने स्वभाव से प्रेरित हुए अन्य देवताओं को विशिष्ट नियम का पालन करते हुए भजते हैं।।

Nepali

जसको ज्ञान कामनाहरूले अपहृत भएको छ, ती मानिस आ-आफ्नो स्वभाव अनुसार नियम पालन गर्दै अरू देवताहरूतर्फ जान्छन्।

Verse 21 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति। तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्

English

Whatever form any devotee desires to worship with faith, I make that same faith of his firm and unflinching.

Hindi

जो-जो (सकामी) भक्त जिस-जिस (देवता के) रूप को श्रद्धा से पूजना चाहता है, उस-उस (भक्त) की मैं उस ही देवता के प्रति श्रद्धा को स्थिर करता हूँ।।

Nepali

जुन-जुन भक्तले श्रद्धापूर्वक जुन-जुन देवताको पूजा गर्न चाहन्छ, मै नै त्यसको त्यो श्रद्धा अचल बनाउँछु।

Verse 22 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते। लभते च ततः कामान्मयैव विहितान् हि तान्

English

Endowed with that faith, he engages in the worship of that form and obtains his desired outcome, which is ordained by Me alone.

Hindi

वह (भक्त) उस श्रद्धा से युक्त होकर उस देवता का पूजन करता है और उससे मेरे द्वारा विधान किये हुये इच्छित भोगों को नि:सन्देह प्राप्त करता है।।

Nepali

त्यो श्रद्धायुक्त भक्त त्यो देवताको पूजा गरेर आफ्ना इच्छित कामना पाउँछ; ती कामनाहरू मैले नै विधान गरेका हुन्।

Verse 23 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम्। देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि

English

Verily, the reward (fruit) that accrues to those men of small intelligence is finite. The worshippers of the gods go to them, whereas My devotees come to Me.

Hindi

परन्तु उन अल्प बुद्धि पुरुषों का वह फल नाशवान् होता है। देवताओं के पूजक देवताओं को प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त मुझे ही प्राप्त होते हैं।।

Nepali

तर अल्पबुद्धिहरूले पाउने त्यो फल अन्तवान् हुन्छ; देवपूजकहरू देवतालाई पाउँछन्, मेरा भक्तहरू मलाई नै पाउँछन्।

Verse 24 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

अव्यक्तं व्यक्ितमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः। परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम्

English

The foolish think of Me, the Unmanifest, as having manifestation, not knowing My higher, immutable, and most excellent nature.

Hindi

बुद्धिहीन पुरुष मेरे अनुत्तम (सर्वोत्तम) अव्यय परम भाव को न जानते हुए मुझ अव्यक्त को व्यक्त मानते हैं।।

Nepali

मूर्खहरूले मेरो परम, अव्यय र अनुपम स्वरूप नजानेकाले अव्यक्त मलाई व्यक्तिगत मानेर ठान्छन्।

Verse 25 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः। मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्

English

I am not manifest to all, veiled as I am by the Yoga-Maya. This deluded world does not know Me, who am unborn and imperishable.

Hindi

अपनी योगमाया से आवृत्त मैं सबको प्रत्यक्ष नहीं होता हूँ। यह मोहित लोक (मनुष्य) मुझ जन्मरहित, अविनाशी को नहीं जानता है।।

Nepali

योगमायाले छोपिएको म सबैका लागि प्रकट छैनँ; अजन्मा, अव्यय मलाई यो मोहित संसारले चिन्दैन।

Verse 26 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन। भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन

English

I know, O Arjuna, the beings of the past, the present, and the future; however, no one knows Me.

Hindi

हे अर्जुन ! पूर्व में व्यतीत हुए और वर्तमान में स्थित तथा भविष्य में होने वाले भूतमात्र को मैं जानता हूँ, परन्तु मुझे कोई भी पुरुष नहीं जानता हैं।।

Nepali

हे अर्जुन! भूत, वर्तमान र भविष्यमा भएका सबै प्राणीहरूलाई म जान्दछु; तर मलाई कसैले पनि पूर्ण रूपमा जान्दैन।

Verse 27 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

इच्छाद्वेषसमुत्थेन द्वन्द्वमोहेन भारत। सर्वभूतानि संमोहं सर्गे यान्ति परन्तप

English

O Bharata, all beings are subject to delusion at birth due to the delusion of the pairs of opposites arising from desire and aversion, O Parantapa.

Hindi

हे परन्तप भारत ! इच्छा और द्वेष से उत्पन्न द्वन्द्वमोह से भूतमात्र उत्पत्ति काल में ही संमोह (अविवेक) को प्राप्त होते हैं।।

Nepali

हे भारत, हे परन्तप! इच्छा-द्वेषबाट उत्पन्न द्वन्द्वले मोहित भएर सम्पूर्ण प्राणी जन्ममै नै मोहमा परेका हुन्छन्।

Verse 28 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम्। ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः

English

But those men of virtuous deeds, whose sins have come to an end and who are freed from the delusion of the pairs of opposites, worship Me steadfastly, with their vows.

Hindi

परन्तु जिन पुण्यकर्मी पुरुषों का पाप नष्ट हो गया है, वे द्वन्द्वमोह से निर्मुक्त और दृढ़वती पुरुष मुझे भजते हैं।।

Nepali

तर पुण्यकर्म गरेका जसका पाप क्षीण भएका छन्, ती द्वन्द्वमोहबाट मुक्त भएर दृढ-व्रती भएर मलाई भज्छन्।

Verse 29 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये। ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्

English

Those who strive for liberation from old age and death, taking refuge in Me, realize in full that Brahman, the whole knowledge of the Self, and all action.

Hindi

जो मेरे शरणागत होकर जरा और मरण से मुक्ति पाने के लिए यत्न करते हैं, वे पुरुष उस ब्रह्म को, सम्पूर्ण अध्यात्म को और सम्पूर्ण कर्म को जानते हैं।।

Nepali

जरा र मरणबाट मुक्तिका लागि ममा शरण लिएर प्रयत्न गर्नेहरूले ब्रह्म, अध्यात्म र सम्पूर्ण कर्म पनि जान्दछन्।

Verse 30 श्रीभगवानुवाच · Krishna speaks
Sanskrit

साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः। प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः

English

Those who know Me with the Adhibhuta (pertaining to the elements), Adhidaiva (pertaining to the gods), and the Adhiyajna (pertaining to the sacrifice) know Me even at the time of death, remaining steadfast in mind.

Hindi

जो पुरुष अधिभूत और अधिदैव तथा अधियज्ञ के सहित मुझे जानते हैं, वे युक्तचित्त वाले पुरुष अन्तकाल में भी मुझे जानते हैं।।

Nepali

जो मलाई अधिभूत, अधिदैव र अधियज्ञसहित जान्दछन्, ती युक्तचित्त मानिसहरूले मरणकालमा पनि मलाई जान्दछन्।